भास्कर न्यूज | अमृतसर पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड (पीएसईबी) एक मार्च को स्कूल ऑफ एमिनेंस की कॉमन एंट्रेंस एग्जाम आयोजित करेगा। एग्जाम के लिए निजी स्कूलों में सेंटर बनाए जाने के फैसले से निजी स्कूल संचालकों में रोष है। रेकोग्नाइजड एफिलिएटिड स्कूल एसोसिएशन (रासा) से संबद्ध स्कूल मुखियों का आरोप है कि बोर्ड ने बिना सहमति के परीक्षा केंद्र घोषित कर दिए और सूचना भी महज 3 दिन पहले दी। स्कूल संचालकों का कहना है कि पहले से ही 12वीं और 8वीं की परीक्षाएं चल रही हैं, जबकि 10वीं की परीक्षाओं की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। ऐसे में अचानक कॉमन एंट्रेंस परीक्षा का अतिरिक्त बोझ डाल देना अव्यवहारिक है। आरोप है कि कई स्कूलों में जरूरत से अधिक विद्यार्थियों की अलॉटमेंट कर दी गई है, जिससे बैठने की व्यवस्था, सुरक्षा, स्टाफ ड्यूटी और अन्य प्रबंधों को लेकर भारी दबाव बन गया है। रासा के प्रदेश महासचिव सुजीत शर्मा, प्रिंसिपल सुशील अग्रवाल, सुमित पुरी, अभिषेक पुरी, कमलजोत कोहली, समीर भाटिया, अरुण मनसोत्रा और रितेश पुरी ने कहा कि बोर्ड ने नादिरशाही फरमान जारी कर निजी स्कूलों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी थोप दी है। रविवार को अधिकांश निजी स्कूलों का स्टाफ अवकाश पर रहता है। परीक्षा ड्यूटी के लिए स्टाफ को बुलाने पर अतिरिक्त वेतन देना पड़ेगा, लेकिन इस संबंध में बोर्ड की ओर से कोई स्पष्ट गाइडलाइन जारी नहीं की गई है। स्टाफ का मेहनताना स्कूलों को अपने फंड से ही देना होगा। स्कूल मुखियों ने बताया कि जिला अमृतसर में रासा से संबद्ध 22 बड़े निजी स्कूलों को स्कूल आफ एमिनेंस की कॉमन एंट्रेस परीक्षा के लिए चयनित किया गया है। लगभग 8 हजार विद्यार्थी प्राइवेट स्कूलों में परीक्षा देंगे। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों के लिए फर्नीचर, सीसीटीवी, सुरक्षा कर्मी, पेयजल, शौचालय और अनुशासन व्यवस्था सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती होगी।


