नियम तोड़ने वाले 34 फार्मेसी कॉलेजों की मान्यता होगी रद्द

झारखंड में फार्मेसी शिक्षा के नाम पर चल रहे फर्जीवाड़े पर अब बड़ी कार्रवाई तय मानी जा रही है। विभागीय नियमों का खुलेआम उल्लंघन कर डिप्लोमा इन फार्मेसी (डी-फार्मा) पाठ्यक्रम संचालित कर रहे राज्य के 34 फार्मेसी कॉलेजों की मान्यता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इन संस्थानों को सरकार की ओर से जारी किया गया ‘लेटर ऑफ कंसेंट’ अब निरस्त किया जाएगा। जांच में खुलासा हुआ है कि इन संस्थानों ने न तो सरकार से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लिया और न ही इसके लिए आवेदन किया। हैरानी की बात यह है कि कई संस्थानों के पास न तो खुद की जमीन है, न भवन, न पर्याप्त शिक्षक और न ही नन-टीचिंग स्टाफ। यह कार्रवाई यूं ही नहीं हुई। दैनिक भास्कर ने लगातार खबरें प्रकाशित कर झारखंड में फार्मेसी शिक्षा के नाम पर चल रहे खेल को उजागर किया था। भास्कर की रिपोर्टिंग के बाद ही स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया और जांच समिति का गठन किया गया। अब जांच रिपोर्ट के बाद उन संस्थानों पर कार्रवाई की तैयारी है। जांच समिति ने उजागर की सच्चाई स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह के निर्देश पर अगस्त 2025 में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी। समिति की अध्यक्षता विभागीय उप सचिव रंजीत लोहरा कर रहे थे। समिति ने राज्य के कुल 71 फार्मेसी संस्थानों की भौतिक जांच की। रिपोर्ट में सामने आया कि बड़ी संख्या में कॉलेज न तो सरकारी प्रावधानों का पालन कर रहे हैं और न ही फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के मानकों पर खरे उतरते हैं। जिन 34 संस्थानों को मान्यता से बाहर करने की तैयारी है, उनके खिलाफ फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया, नई दिल्ली को पत्र भेजकर 2025-26 में नए नामांकन पर रोक लगाने की अनुशंसा की जाएगी। छात्रों की परीक्षा और रजिस्ट्रेशन पर भी संकट स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट संकेत दिया है कि जिन संस्थानों ने अब तक वैध एनओसी नहीं ली है, उनके छात्रों का परीक्षा पंजीकरण रोका जा सकता है। केवल लेटर ऑफ कंसेंट के आधार पर परीक्षा लेने की अंतरिम व्यवस्था को वर्ष 2025-26 से समाप्त कर दिया जाएगा। 36 अन्य संस्थानों पर भी संकट जांच में 36 ऐसे फार्मेसी कॉलेज भी चिह्नित किए गए हैं, जहां आंशिक रूप से भवन और भूमि तो है, लेकिन टीचिंग व नन-टीचिंग स्टाफ की भारी कमी है। इन संस्थानों ने भी अब तक एनओसी नहीं ली है। स्वास्थ्य विभाग ने इन सभी संस्थानों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है।

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