भास्कर न्यूज| दोरनापाल सिलगेर में बीते दिनों नक्सलियों ने शिक्षादूत बारसे लक्ष्मण की निर्मम हत्या कर दी। इस वारदात के बाद अंचल के शिक्षादूतों में आक्रोश है। उन्होंने कहा कि शिक्षादूत अपने स्कूल से वापस आ रहा था, उसी समय नक्सलियों ने वारदात को अंजाम दिया। उन्होंने सवाल खड़े करते कहा कि शिक्षा की ज्योति जलाए रखने निर्दोष शिक्षादूतों को निशाना क्यों बनाया जा रहा है और कब तक इस तरह से निर्दोषों की जान जाती रहेगी। चिंतागुफा में हुई शिक्षादूतों की आपात बैठक में सभी ने एकजुट होकर नक्सलियों से बारसे लक्ष्मण के पुलिस के लिए मुखबिरी करने के सबूत मांगे। उनका कहना है कि यदि उन पर मुखबिरी के आरोप लगाए जाते हैं तो इसके प्रमाण भी सामने लाए जाएं। उन्होंने कहा कि वे बच्चों को पढ़ाने आए हैं, मुखबिरी से उनका कोई लेना-देना नहीं है। बैठक में प्रशासन पर भी उन्होंने सवाल खड़े करते कहा कि उन्हें लगातार नक्सल इलाकों में भेजा जाता है, लेकिन सुरक्षा इंतज़ाम नहीं किए जाते। शिक्षादूतों की जान की जिम्मेदारी कौन लेगा, सबसे पहले ये जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अब वे चुप नहीं रहेंगे।


