भास्कर न्यूज | जालंधर केंद्र सरकार ने निर्यातकों के लिए मार्च में विशेष अभियान की घोषणा की है ताकि लंबित बैंक गारंटी और बॉन्ड रिलीज किए जा सकें। कई एक्सपोर्ट कंपनियों की बैंक गारंटी और बॉन्ड लंबे समय से फंसी हुई थीं। इसका कारण यह था कि कंपनियों ने निर्यात दायित्व पूर्ति प्रमाणपत्र (ईओडीसी) नहीं प्राप्त किया था। यह प्रमाणपत्र दर्शाता है कि कंपनी ने अपने निर्यात का काम पूरा कर लिया है। प्रमाणपत्र न होने के कारण सरकारी राशि फंसी रहती थी और कंपनियों को अपनी फंसी पूंजी वापस पाने में परेशानी हो रही थी। समस्या का समाधान करने के लिए वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने 1 से 31 मार्च 2026 तक एक विशेष अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत लंबित ईओडीसी मामलों का निपटारा किया जाएगा। आवेदनों की जांच और निपटारे के बाद कंपनियों की बैंक गारंटी और बॉन्ड रिलीज हो सकेंगे। इससे उद्यमियों की फंसी पूंजी मुक्त होगी और पुराने मामलों का स्थायी समाधान होगा। यह अभियान विशेष रूप से एडवांस ऑथराइजेशन और ईपीसीजी (एक्सपोर्ट प्रमोशन कैपिटल गुड्स) योजनाओं के तहत लंबित मामलों के लिए है। विभाग ने कहा है कि सभी दस्तावेज़ जैसे शिपिंग बिल और ई-बीआरसी सही तरीके से पोर्टल पर लिंक किए जाने चाहिए। केवल पूरी तरह सही दस्तावेजों के आधार पर आवेदनों का निपटारा किया जाएगा। निर्यातकों की सुविधा और फाइलों के तेजी से निपटारे के लिए डीजीएफटी का लुधियाना कार्यालय मार्च के पूरे महीने में शनिवार और रविवार को भी खुला रहेगा। विभाग ने निर्यातकों को सलाह दी है कि वे अपने लंबित ईओडीसी आवेदनों की स्थिति की समीक्षा करें। यदि कोई कमी हो, तो उसे एक सप्ताह के भीतर पूरा करें। सभी दस्तावेज और स्पष्टीकरण डिजिटल रूप से पोर्टल पर जमा करें और टुकड़ों में जानकारी देने के बजाय एक साथ सब कुछ अपलोड करें। यह फायदा होगा अभियान का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि लंबित मामलों का निपटारा होने के बाद कंपनियों को फंसी पूंजी वापस मिलेगी। इससे निर्यातक अपने व्यवसाय को सुचारू रूप से चला सकेंगे और पुराने लंबित मामलों से मुक्त होंगे। विभाग का कहना है कि यह कदम निर्यातकों के लिए वित्तीय राहत देने और निर्यात प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।


