भारत-पाकिस्तान पर बसे बाड़मेर के धोरों वाली धरती पर एक ऐसी ‘पाठशाला’ चल रही है, जहां गरीबी की कड़वाहट को कामयाबी की मिठास में बदला जा रहा है। यह कहानी है ‘फिफ्टी विलेजर्स सेवा संस्थान’की है, जो अभावों की रेतीली जमीन से एमबीबीएस तैयार कर रही है। यह कहानी उन बच्चों की है, जिनके पास प्रतिभा थी लेकिन साधन नहीं थे। किसान, मजदूर, अनाथ जो कभी स्कूल की आखिरी बेंच पर बैठते थे, वो आज देश के प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टर बनने की राह पर हैं। इनमे से 140 छात्र सरकारी मेडिकल कॉलेजों में चयनित होकर पढ़ाई कर रहे है। नरेगा वाली मां का बेटा बना डॉक्टर बाड़मेर के सरणू पनजी निवासी महादेव के सिर से पिता और दादा का छाया उठ गया था, मां नरेगा पर मजदूरी कर घर का गुजारा करती थी। डॉक्टर की पढ़ाई एक सपना था लेकिन उस गरीब बच्चे महादेव को संस्थान ने एडमिशन िदया। इसके बाद अब वह मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर की पढ़ाई कर रहा है। बर्तन धोने वाले पिता का बेटा बना डॉक्टर बालोतरा के खट्टू के रहने वाले श्रवण कुमार के माता-पिता ने दूसरों की शादियों में बर्तन मांज कर दिन गुजारे। इस बीच सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले श्रवण कुमार को संस्थान ने एडमिशन दिया। इसके बाद अब उनका बेटा दूसरों की बीमारियां दूर करने का हुनर सीख रहा है। संस्थान की उपलब्धि 140 छात्र: सरकारी मेडिकल कॉलेजों में चयनित होकर सफलता का परचम लहरा चुके हैं। 25 छात्र: एम्स (AIIMS) जैसे देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एमबीबीएस कर रहे हैं। 50+ अनाथ बच्चे: ऐसे विद्यार्थी जिन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया था, आज समाज के नायक बन रहे हैं। संस्थान के डॉ. भरत सारण ने बताया कि इस संस्थान की शुरुआत 25 मई 2012 को हुई थी। मकसद एक ही था सरकारी स्कूलों से ऐसे गरीब बच्चों की तलाश करना, जिनके पास हुनर तो है, लेकिन संसाधनों की कमी से आगे नहीं पढ़ पाते है। जिंदगी में मुकाम हासिल करने के बाद अधिकतर लोग अपनी दुनिया में व्यस्त हो जाते हैं, लेकिन झुंझुनूं में कुछ युवाओं ने सफलता के बाद समाज को कुछ लौटाने का संकल्प लिया। इसी सोच से 14 साल पहले शुरू हुई निशुल्क कोचिंग की यह पहल आज सैकड़ों युवाओं के लिए उम्मीद की मजबूत पाठशाला बन चुकी है। आज के समय में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विद्यार्थियों को हर महीने बड़ी राशि खर्च करनी पड़ती है, लेकिन झुंझुनूं में संचालित यह फ्री कोचिंग आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए वरदान साबित हो रही है। हम बात कर रहे हैं सैनी समाज के युवाओं की फ्री कोचिंग की। इस फ्री क्लास से समाज के 120 से ज्यादा लोग जुड़े हुए हैं। अपनी बारी के हिसाब से बच्चों को तैयारी कराते हैं। रिटर्न परीक्षा के साथ ग्रुप डिस्कशन, इंटरव्यू और पर्सनालिटी डवलपमेंट की तैयारी भी कराई जा रही है। इस फ्री कोचिंग में तैयारी करके 125 से ज्यादा समाज के बच्चे सरकारी नौकरी हासिल कर चुके हैं। इनमें सर्वाधिक 80 से अधिक बैंकिंग सेक्टर में, रेलवे में 14, एसएससी में 15 तथा कांस्टेबल, पटवारी, जीडी सहित अन्य पदों पर 16 का चयन हुआ है। फ्री कोचिंग की शुरुआत 24 अक्टूबर 2012 को सात दोस्तों ने की थी। ये सभी जोधपुर में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे। नौकरी मिलने के बाद उन्होंने महसूस किया कि समाज का हर विद्यार्थी जोधपुर जाकर तैयारी नहीं कर सकता। इसी सोच के साथ उन्होंने झुंझुनूं में ही निशुल्क कोचिंग शुरू करने का निर्णय लिया। शुरुआत में एक खाली भूखंड में घरों से कुर्सियां लाकर कक्षाएं लगाई गईं। पहले बैच में केवल पांच विद्यार्थी आए, लेकिन दोस्तों ने हिम्मत नहीं हारी। इनमें से तीन का सरकारी सेवा में चयन हो गया। इसके बाद विद्यार्थियों की संख्या लगातार बढ़ती गई और आज हर बैच में 100 से 125 तक विद्यार्थी जुड़ रहे हैं।


