प्रदेश में आधे से ज्यादा शैक्षणिक सत्र खत्म हो चुका है, लेकिन अब भी छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क यूनिफॉर्म का इंतजार है। प्रक्रिया टेंडर में अटकी हुई है। ऐसे में मुख्यमंत्री नि:शुल्क यूनिफॉर्म वितरण योजना पर सवाल खड़े हो रहे हैं। मौजूदा प्रक्रिया को देखते हुए यूनिफार्म अगले साल फरवरी से अप्रैल तक मिलेगी। खास बात यह है कि उदयपुर में कक्षा 12वीं में पढ़ रही करीब 13 हजार 944 में से 13 हजार सहित प्रदेश की 2 लाख 81 हजार 149 में से 2.50 लाख लड़कियों के लिए मार्च-अप्रैल के बाद यह यूनिफॉर्म किसी काम की नहीं रहेगी, क्योंकि ये बच्चियां 12वीं कक्षा उत्तीर्ण कर कॉलेजों में दाखिला ले चुकी होंगी। उदयपुर के 4 लाख 41 हजार 976 सहित पूरे प्रदेश में 69 लाख 9 हजार 731 लड़के-लड़कियों को यूनिफॉर्म दी जानी है। ऐसे में छात्र-छात्राएं पिछले साल की यूनिफॉर्म ही पहनकर स्कूल आ-जा रहे हैं। जिस दिन ये धुलती हैं, उस दिन मजबूरीवश सामान्य कपड़ों में स्कूल पहुंचते हैं। प्रक्रिया उलझी :2.50 लाख छात्राओं के काम नहीं आएगी निशुल्क यूनिफॉर्म की योजना अभी टेंडर प्रक्रिया में उलझी है। कक्षा एक से 5वीं तक के बच्चे-बच्चियों को दी जाने वाली यूनिफॉर्म प्रदेश के लघु एवं सूक्ष्म उद्योगों से खरीदना अनिवार्य है। शिक्षा परिषद ने इस शर्त से मुक्ति पाने के लिए वित्त विभाग को प्रस्ताव भेजा है। इस पर निर्णय बाकी है। अभी फेब्रिक के लिए 223 करोड़ के टेंडर की टेक्निकल बिड खुली है। इसके बाद फाइनेंशियल बिड खुलेगी। फिर जनवरी 2025 तक वर्क ऑर्डर की संभावना है। इस लिहाज से यूनिफॉर्म फरवरी से अप्रैल के बीच आ सकेगी। मार्च-अप्रैल तक कक्षा 8 से 12वीं तक की सभी परीक्षाएं हो चुकी होंगी। ऐसे में ये यूनिफॉर्म इस साल स्कूली बच्चों के काम ही नहीं आ सकेंगी। सिलाई के लिए 100 रु., ये नाकाफी
योजना के मुताबिक कक्षा एक से 5वीं तक के छात्र-छात्राओं को रेडीमेड यूनिफॉर्म दी जाएगी। कक्षा 6 से 12वीं तक हर एक को दो ड्रेस के लिए कपड़ा व 200 रुपए सिलाई के लिए दिए जाएंगे। चूंकि, यह योजना 9 से 12वीं तक केवल बच्चियों के लिए लागू है, ऐसे में उन्हें ही इसका फायदा मिलेगा, जबकि कक्षा 6 से 9वीं तक लड़के-लड़कियों को समान रूप से लाभ मिलेगा। अब सवाल यह भी है कि 100 रु. में एक ड्रेस कौन सिलकर देगा। ऐसे में परिजनों को पैसे खर्च करने पड़ेंगे। पिछले साल भी नवंबर तक मिली यूनिफॉर्म
पिछले शैक्षणिक सत्र में भी तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने बजट समय पर नहीं दिया। बाद में केवल कपड़ा ही दिया। सिलाई के 200 रु. के लिए भी बच्चों को इंतजार करना पड़ा था। वे नवंबर-दिसबर में यूनिफॉर्म पहन सके थे। टेंडर प्रक्रिया जारी : आयुक्त
कक्षा एक से 5वीं तक के सभी बच्चों को रेडीमेड ड्रेस, 6-8वीं तक 2 जोड़ी ड्रेस के लिए कपड़े व 200 रु. सिलाई, 9-12वीं तक की सिर्फ बेटियों को 2-2 ड्रेस के कपड़े व 200 रु. सिलाई के लिए मिलेंगे। टेंडर प्रक्रिया चल रही है। हमारा फोकस जल्द उपलब्ध कराने पर है।
-अविचल चतुर्वेदी, राज्य परियोजना निदेशक, समग्र शिक्षा एवं आयुक्त राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद, राजस्थान प्रशासनिक अनदेखी : संगठन
प्रदेश सरकार की ओर से बजट देने के बाद भी योजना के तहत स्कूली बच्चों को यूनिफॉर्म समय पर नहीं मिलना प्रशासनिक अनदेखी को दिखाता है। अगर समय पर रेडीमेड ड्रेस व कपड़ा मिल जाता तो गरीब अभिभावकों के बच्चे पिछले साल के पुराने कपड़े पहनकर स्कूल जाने को मजबूर नहीं होते।
-शेर सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष, राजस्थान पंचायती राज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ


