नीमच नगर पालिका की लापरवाही के कारण नववर्ष के पहले दिन शहर में मांस विक्रय पर प्रतिबंध लगा दिया गया। इस आदेश से शहर के मांस विक्रेताओं को सीधे तौर पर नुकसान उठाना पड़ा। नगर पालिका प्रशासन ने गुरुवार को बिना किसी ठोस आधार के मांसाहार विक्रय पर प्रतिबंध का आदेश जारी कर विक्रेताओं को इसकी सूचना दी थी। हैरानी की बात यह थी कि कैलेंडर में उस दिन कोई भी ऐसा धार्मिक त्योहार या विशेष दिवस नहीं था, जिसके चलते मांस की दुकानों को बंद रखा जाए। इसके बावजूद, नगर पालिका का अमला सक्रिय हुआ और अंबेडकर कॉलोनी स्थित स्लॉटर हाउस पहुंच गया। वहां कैंट थाना पुलिस के दो जवानों की मौजूदगी में दुकानों को जबरन बंद कराकर स्लॉटर हाउस पर ताला लगा दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर पार्षद प्रतिनिधि इकबाल कुरैशी ने कड़ा विरोध जताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश शासन की ओर से नववर्ष पर स्लॉटर हाउस बंद रखने का कोई भी आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया था। कुरैशी ने आरोप लगाया कि नगर पालिका ने भारी चूक करते हुए यह आदेश जारी किया था, जिसकी जानकारी समय रहते अधिकारियों को भी दी गई थी, लेकिन कार्रवाई नहीं रोकी गई। दोषी कर्मचारी पर होगी कार्रवाई मामले ने जब तूल पकड़ा, तो नगर पालिका सीएमओ दुर्गा बामनिया ने मीडिया से चर्चा के दौरान विभाग की लापरवाही को स्वीकार किया। उन्होंने बताया कि यह पूरी गड़बड़ी गलतफहमी के कारण हुई, क्योंकि संबंधित कर्मचारी ने पुराने कैलेंडर के आधार पर सूचना पत्र चस्पा कर दिया था। सीएमओ ने माना कि नगर पालिका से यह गलत आदेश जारी हुआ था। इस मामले में दोषी कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर कड़ी चेतावनी दी गई है। नगर पालिका की इस गैर-जिम्मेदाराना कार्यप्रणाली से नए साल के दिन न केवल मांस विक्रेताओं का आर्थिक नुकसान हुआ, बल्कि शहर की प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।


