नीमच में मधुमक्खी पालन की तकनीकें सीखेंगे 10 किसान:झाबुआ कलेक्टर ने दल को प्रशिक्षण सह-भ्रमण पर भेजा

झाबुआ जिले में कृषि नवाचारों को बढ़ावा देने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से कलेक्टर नेहा मीना ने आज एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के तहत चयनित किसानों के एक दल को तीन दिवसीय प्रशिक्षण सह-भ्रमण (एक्सपोजर विजिट) के लिए रवाना किया। यह पहल वर्ष 2025-26 के लिए मधुमक्खी पालन को प्रोत्साहित करने की योजना का हिस्सा है। कलेक्टर ने किसानों को संबोधित किया कलेक्टर नेहा मीना ने किसानों से कहा कि इस भ्रमण का मुख्य उद्देश्य सफल नवाचारों से प्रत्यक्ष और व्यावहारिक सीख प्राप्त करना है। उन्होंने आग्रह किया कि किसान मधुमक्खी पालन की आधुनिक तकनीकों, वैज्ञानिक प्रबंधन पद्धतियों और शहद उत्पादन की विधियों को गंभीरता से समझें और उन्हें अपने क्षेत्रों में लागू करें। मधुमक्खी पालन का महत्व कलेक्टर ने मधुमक्खी पालन को कम लागत में अधिक आय देने वाला व्यवसाय बताते हुए कहा कि यह बागवानी और कृषि फसलों के उत्पादन में भी वृद्धि करता है। कलेक्टर के विशेष प्रयासों से कुल 10 किसानों का चयन किया गया है। इसमें पेटलावद और रामा विकासखंड से तीन-तीन किसान, जबकि झाबुआ, मेघनगर, राणापुर और थांदला से एक-एक किसान शामिल हैं। प्रथम चरण का भ्रमण भ्रमण के दौरान किसान सबसे पहले नीमच जिले के जावद विकासखंड स्थित ग्राम अठाना में उन्नतशील मधुमक्खी पालक सुरेशचंद धाकड़ के खेत का दौरा करेंगे। यहां वे स्थापित 70-80 मधुमक्खी पेटिकाओं और छत्तों का अवलोकन करेंगे और मधुमक्खी पालन एवं शहद उत्पादन से संबंधित तकनीकी जानकारी प्राप्त करेंगे। कृषि विज्ञान केंद्र में प्रशिक्षण इसके अतिरिक्त, दल को कृषि विज्ञान केंद्र, नीमच में एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। प्रशिक्षण में कीट वैज्ञानिक डॉ. एस.एस. सारंगदेव और वैज्ञानिक डॉ. गोविंद सिंह मधुमक्खी पालन विषय पर विस्तृत जानकारी प्रदान करेंगे। प्रशिक्षण के उद्देश्य यह प्रशिक्षण सह-भ्रमण जिले में मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने, किसानों की आय में वृद्धि करने और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित करने में सहायक सिद्ध होगा। इस अवसर पर अपर कलेक्टर सी.एस. सोलंकी, सहायक संचालक उद्यान बहादुर सिंह चौहान और अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे। किसानों के लिए सीख और अनुप्रयोग कलेक्टर ने किसानों से कहा कि इस प्रशिक्षण और भ्रमण में सीखी गई तकनीकों को अपने खेतों और बागवानी में लागू करें ताकि उत्पादन और आय में सुधार हो। इस पहल के माध्यम से जिला प्रशासन नवाचार, तकनीकी प्रशिक्षण और स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहा है।

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