नृत्य नाटिका ‘अतिरथी’ ने सिखाया अच्छे-बुरे में फर्क:जेकेके में विश्व नृत्य दिवस पर हुआ विशेष कार्यक्रम, ‘नमामि’ में की भगवान शिव की स्तुति

जवाहर कला केंद्र में विश्व नृत्य दिवस के अवसर पर विशेष नृत्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान नृत्य के विभिन्न रूपों को प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दिल्ली के अन्वेषणा समूह द्वारा प्रस्तुत ‘अतिरथी’ समकालीन नृत्य नाटिका से हुई। वहीं दूसरी ओर शिव आराधना पर आधारित नृत्य संरचना ‘नमामि’ ने दर्शकों को भावपूर्ण अनुभव कराया। ‘अतिरथी’ समकालीन नृत्य नाटिका में महाभारत के योद्धाओं कर्ण और अर्जुन के बीच के संघर्ष, नैतिक द्वंद्व और आंतरिक भावनाओं को नृत्य के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से मंचित किया गया। नाटिका ने दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर किया कि जीवन में अच्छाई और बुराई के बीच फर्क करना कितना कठिन हो सकता है। इस प्रस्तुति का निर्देशन और कोरियोग्राफी संगीता शर्मा ने की, सह-कोरियोग्राफर सुभाषिश डे रहे।
कलाकारों में संगीता शर्मा, सुभाषिश डे, तुषार यादव और अभिनव मलिक शामिल रहे। प्रकाश व्यवस्था अतुल मिश्रा और संगीत संयोजन जीवेश सिंह ने संभाला। कार्यक्रम की दूसरी प्रस्तुति नृत्य गुरु नमिता जैन द्वारा तैयार नृत्य संरचना ‘नमामि’ रही। यह प्रस्तुति भगवान शिव को समर्पित थी, जिन्हें नृत्य के आदिप्रवर्तक नटराज के रूप में पूजा जाता है। ‘नमामि’ में शिव की आराधना को नृत्य के माध्यम से जीवंत करते हुए शिष्यों ने भाव, रचना और लय का अद्भुत संयोजन प्रस्तुत किया। कलाकारों की सधी हुई मुद्राएँ और भाव भंगिमाएँ शिव तत्त्व की भक्ति और नृत्य की दिव्यता का सुंदर प्रतीक बनीं। ‘नमामि’ ने शास्त्रीय परंपरा और समर्पण की भावना को मंच पर प्रभावशाली ढंग से साकार किया। मंच पर नव्या झाखड़, सिधि जैन, कोमल, तानिश्का, मान्या, अतुलित, यशवर्धन और युवराज सिंह कुल आठ कलाकारों ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

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