वर्ष 2010 में हम बॉक्साइट का काम करने की योजना से नेतरहाट आए थे। बॉक्साइट उठाव का काम देखते थे। वर्ष 2014 से पहले तक हम दोनों भाइयों ने बॉक्साइट का काम किया। व्यापार में घाटा होने पर कंपनी ने अपना व्यापार समेट कर चली गई, लेकिन हम वापस अपने घर नहीं लौटे। नेतरहाट में ही एक एकड़ जमीन लीज पर लेकर सब्जी की खेती पर अध्ययन किया। इसके बाद आधुनिक विधि से सब्जी की खेती शुरू की। आय में वृद्धि होने पर प्रयोग के तौर पर स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की। वर्ष 2017-18 में 50 डिसमिल जमीन में स्ट्रॉबेरी लगाए। पौधे की क्वालिटी अच्छी नहीं रहने से पर्याप्त फल नहीं मिला। जिससे आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा। जो स्ट्रॉबेरी तैयार हुए उसका जैम बनाकर नेतरहाट घूमने आए पर्यटकों से बेचा। इससे डेढ़ लाख रुपए की आमदनी हुई। अब क्षेत्र के कई किसान इस काम में जुड़ गए हैं। स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए सही है यहां का मौसम वे बताते हैं कि नेतरहाट की भूमि व जलवायु स्ट्रॉबेरी के पौधे तैयार करने के अनुकूल रहने पर धीरे-धीरे जमीन लीज पर लेनी शुरू कर दी। अगल-बगल के किसानों को प्रोत्साहित कर 24 एकड़ खेत में स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की। आधुनिक खेती से पानी की कमी को दूर करने के लिए टपक सिंचाई पद्धति अपनाई। यहां नर्सरी बनाकर स्ट्रॉबेरी के पौधे तैयार करने लगे। आज झारखंड के कई जिलों समेत छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम, मणिपुर जैसे दूसरे राज्यों में स्ट्रॉबेरी के पौधे व फल बेच रहे हैं। लगभग 10 लाख की है सालाना आय उसके पौधे से प्रतिवर्ष करीब 8 लाख एवं फल से करीब 2 लाख रुपए का मुनाफा हो रहा है। 2024 में नेशनल हार्टिकल्चर का लाइसेंस भी मिल गया है। टेक्निकल एंड साइंटिफिक सपोर्ट के लिए इंडियन कॉसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च (आईसीएआर) पलांडू से भी जुड़ गए हैं। नेतरहाट के वातावरण में विशेषज्ञों की सलाह से स्ट्रॉबेरी के पौधे से नए पौधे तैयार किए जा रहे हैं। यहां लोग स्ट्रॉबेरी के पौधे महाराष्ट्र के महाबलेश्वर व हिमाचल के सोलन से मंगवाते हैं। पौधे लाते समय उसे सूखने से बचाना जोखिम भरा होता है। ऐसे में नेतरहाट में स्ट्रॉबेरी के विभिन्न नस्लों के पौधे तैयार करने की योजना है। स्ट्रॉबेरी की खेती महंगी है। कौन हैं श्रीनिवासन व राम राजू आंध्र प्रदेश के ईस्ट गोदावरी (अब डॉ. बीआर अंबेडकर कोनासीमा) जिला के रहने वाले दोनों भाई श्रीनिवासन राजू व राम राजू नेतरहाट में स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए जाने जाते हैं। इनकी नर्सरी में स्ट्रॉबेरी के पौधे के साथ फल भी तैयार किए जा रहे हैं। यह करीब 11 वर्षों से क्षेत्र में किसानों को स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए प्रेरित कर रहे हैं। आंध्र प्रदेश के दोनों भाई बीए तक की पढ़ाई की है। इन्होंने खेती बागवानी की नई तकनीक से किसानों को प्रेरित किया है।


