नेत्रदान महादान:एम्स में चल रही रिसर्च, अंधापन दूर करने के लिए लगेगा कृत्रिम कॉर्निया

नेत्रदान महादान है। आपकी दान की गई आंखें कई लोगों की दुनिया में रोशनी भरती हैं। लेकिन समय रहते दान कम होने से वर्तमान में 50 प्रतिशत लोगों को भी आंखें नहीं मिल पातीं। आने वाले समय में दृष्टिहीन लोग भी देख सकें इसके लिए देश में सिंथेटिक कॉर्निया ट्रांसप्लांट पर रिसर्च चल रही है। इसके पूरा होने में करीब पांच साल और लग सकते हैं। रिसर्च सफल रहती है तो अंधेपन की समस्या से लोगों को निजात दिलाई जा सकेगी। नई दिल्ली एम्स के अतिरिक्त प्रोफेसर कॉर्निया ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ. प्रफुल्ल महाराणा ने भास्कर से खास बातचीत में यह जानकारी दी। राजस्थान ऑप्थेल्मोलॉजी सोसायटी प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने आए डॉ. महाराणा एम्स के आरपी सेंटर में आर्टीफिशियल कॉर्निया पर रिसर्च कर रहे हैं। कार्यशाला में प्रिंसिपल बोले- नेत्र सर्जरी में बीकानेर पहले नंबर पर सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग तथा राजस्थान ऑप्थेल्मोलॉजी सोसायटी के संयुक्त तत्वाधान में राजस्थान के सभी मेडिकल कॉलेज में अध्ययनरत पीजी छात्रों के लिये कॉर्निया विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. गुंजन सोनी ने इस अवसर पर कहा कि सरदार पटेल आयुर्विज्ञान महाविद्यालय का नेत्र विभाग में रोज 70 से 80 ऑपरेशन होते हैं, जो कि राजस्थान के समस्त मेडिकल कॉलेज में सर्वप्रथम है। हाल ही राजस्थान सरकार द्वारा इस विभाग में पर्दे की सर्जरी की सुविधा के लिये राजस्थान सरकार द्वारा बजट स्वीकृत किया गया है जो इस पूरे बीकानेर संभाग के लिये अत्यंत उपयोगी रहेगा। इस कार्यशाला के दौरान कुल 6 सत्र आयोजित किये गये, जिसके अन्तर्गत नेत्र विशेषज्ञों ने कॉर्निया से संबंधित बीमारियों के निदान व उपचार के बारे में विस्तार से बताया। एम्स से ख्यातनाम नेत्र चिकित्सक डॉ प्रफुल्ल महाराणा ने कार्यशाला में कॉर्निया की बीमारियों का पता लगाने तथा नेत्र प्रत्यारोपण से संबंधित कई जानकारियां दी। अहमदाबाद के डॉ. आशीष नागपाल, एम्स के डॉ. परिणति सहाय, जयपुर एसएमएस मेडिकल कॉलेज के कॉर्निया विशेषज्ञ डॉ. धर्मवीर चौधरी, जयपुर की कॉर्निया विशेषज्ञ डॉ नेहा पाठक ने केरेटोकोनस बीमारी, जयपुर से आये डॉ. अंकुर मिड्ढा ने निदान में काम आने वाले उपकरणों के बारे में विस्तार से बताया। मोबाइल से बच्चों को मायोपिया होने का खतरा बच्चों में बढ़ती मोबाइल की प्रवृति के सवाल पर डॉ. प्रफुल्ल महाराणा का कहना है कि मोबाइल की स्क्रीन छोटी होती है। बच्चे पलक झपकाए बिना देर तक उसे देखते रहते हैं। इस वजह से आंखों में सूखापन आैर मायोपिया होने का खतरा बना रहता है। कॉर्निया पर स्पॉट बन जाते हैं। ज्यादा समय तक कंप्यूटर स्क्रीन पर बैठने वालों को भी कंप्यूटर विजन सिंड्रॉम हो जाता है। इसलिए लगातार चार घंटे तक स्क्रीन के सामने नहीं बैठना चाहिए। पलकें झपकाते रहें। बीच-बीच में ब्रेक लेते रहें। गर्मी में एलर्जी की समस्या गर्मी का मौसम आ रही है। इस मौसम में आमतौर पर बच्चों की आंखों में एलर्जी हो जाती है। बच्चों आंखों में खुजली करते हैं, जिसका असर कॉर्निया पर पड़ता है। इसके उपचार के लिए नेत्ररोग विशेषज्ञ की सलाह पर ही दवा का उपयोग करें। स्टेरॉयड का यूज ना करें। इससे आंखें में काला और सफेद मोतिया होने का खतरा बढ़ जाता है।

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