नेपानगर में लीज रेंट का विरोध:व्यापारी आंदोलन की राह पर, मिल प्रबंधन का दावा- 204 लोगों ने किया नवीनीकरण

नेपानगर में नेपा मिल प्रबंधन और व्यापारियों के बीच लीज रेंट का मामला सुलझ नहीं पा रहा है। मिल प्रबंधन द्वारा निर्धारित नई दरों का व्यापारी विरोध कर रहे हैं। भारी उद्योग मंत्रालय के उपक्रम नेपा लिमिटेड ने पुराने वाणिज्यिक भूखंडों के लिए 140 रुपए और नए वाणिज्यिक भूखंडों के लिए 160 रुपए प्रति वर्गफीट का रेंट तय किया है। आवासीय भूखंडों के लिए पुराने आवंटियों को 70 रुपए और नए आवंटियों को 90 रुपए प्रति वर्गफीट का रेंट देना होगा। मिल के जनसंपर्क अधिकारी संदीप ठाकरे के मुताबिक, 9 जनवरी तक नवीनीकरण की समय सीमा में कुल 204 भूखंडधारियों ने अपना लीज नवीनीकरण कराया है, जिनमें से 117 लोगों ने अंतिम दिन शुल्क जमा किया। कई भूखंडधारी अब समय सीमा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। इधर, शनिवार को हुई व्यापारिक संघ की बैठक में सभी ने एकमत से इन बढ़ी हुई दरों का विरोध किया। मातापुर व्यापारिक संघ के अध्यक्ष राजेश चौहान ने कहा कि लीज रेंट इतना अधिक है कि कोई भी व्यापारी इतनी राशि का भुगतान करने में सक्षम नहीं है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले 20 नवंबर 2024 को भी व्यापारियों ने एक दिन की हड़ताल कर मौन रैली निकाली थी और नेपा मिल के अध्ययन सह प्रबंध निदेशक राकेश कुमार चोखानी को ज्ञापन सौंपा था। व्यापारियों का कहना है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे फिर से आंदोलन करेंगे। पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष सोहन सैनी ने कहा- नगर बचाओ समिति नेपानगर बंद रखकर मिल का घेराव करेगी। लीज रेंट ज्यादा है। व्यापारी इसे भरने में सक्षम नहीं हैं। व्यापारियों की हुई बैठक, सभी ने एकमत से किया विरोध इधर, शनिवार को व्यापारिक संघ की बैठक आयोजित हुई जिसमें सभी ने एकमत से लीज रेंट का विरोध किया। इसके लिए खुलकर लड़ाई लड़ने की बात कही है। कानूनी तरीके से भी अपनी बात रखने की तैयारी है। मातापुर व्यापारिक संघ अध्यक्ष ने कहा-लीज रेंज काफी अधिक है। कोई भी व्यापारी इतनी अधिक राशि भरने में समर्थ नहीं है। 9 जनवरी को कुछ लोगों से पांच पांच हजार रूपए जमा करवाए गए, लेकिन यह किस नियम के तहत कराए गए। प्रबंधन से यह बात पूछी जाना चाहिए। समाजसेवी विनोद पाटिल ने कहा- सभी ने मिलकर निर्णय लिया है। संजय विजयवर्गीय ने कहा 1200 से 1500 करोड़ रूपए खर्च कर मिल दोबारा अस्तित्व में आई, लेकिन उत्पादन ठप्प है। इतना पैसा खर्च करने के बाद भी प्रबंधन उसे चलायमान नहीं रख पा रहा है। क्या गारंटी है कि अब 150 करोड़ का पैकेज मांग कर फिर मिल को पहले की तरह चला लेंगे। यह सब ध्यान भटकाने की एक कोशिश है। मिल प्रबंधन से पूछा जाना चाहिए कि जिन लोगों से पांच पांच हजार रूपए जमा कराए गए हैं उनके कितने लीज होल्डर हैं। किसी को कोई सूचना नहीं दी थी पांच हजार रूपए जमा करेंगे न ही नगर में पैसा जमा कराने की कोई सूचना प्रचारित की गई। नेपानगर बंद कर मिल का घेराव करेंगे
व्यापारी संघ के सोहन सैनी ने कहा-सभी लोगों के साथ मिलकर नगर बचाओ समिति के माध्यम से नेपानगर बंद कर मिल का घेराव किया जाएगा। नेपा मिल में सूचना का अधिकार लगाकर जानकारी भी मांगी गई है। तय किया गया लीज रेंट काफी अधिक और मनमाना है। 2002 में पांच से 10 रूपए लीज रेंट हुआ करता था। इस बार लीज रेंट 140 प्लस जीएसटी, 20 रूपए अनुज्ञा शुल्क जोड़ा गया है जो कुल 180 स्कवेयर फिट हो रहा है। अब तक लीज रेंट के मामले में यह हुआ दरअसल 3 माह पहले नेपा मिल ने लीज रेंट में वृद्धि की थी जिसका खासा विरोध हुआ था। 20 नवंबर को नगर के व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद रखकर मौन रैली निकाली थी। सीएमडी राकेश कुमार चोखानी को ज्ञापन सौंपा गया था। बाद में मिल की ओर से सूचना चस्पा की गई है जिसमें लीज रेंट की दरों में तीसरी बार कमी की गई और नवीनीकरण आवेदन के लिए एक माह का समय दिया गया। 9 जनवरी आवेदन की आखिरी तारीख थी। मिल अफसरों के अनुसार अब तक करीब 204 आवेदन लीज नवीनीकरण के आ चुके हैं। मिल की ओर से पहले लीज रेंट 600 रूपए प्रति वर्ग फीट किया गया था। इसका खासा विरोध हुआ तब रेंट 360 रूपए कर दिया गया, लेकिन व्यापारियों ने फिर भी विरोध किया तब 200 रूपए लीज किया गया। इसके बाद 20 नवंबर को व्यापारियों ने फिर आक्रोश जताते हुए दुकानें बंद रखकर मौन रैली निकाली थी तब तीसरी बार इसमें संशोधन किया गया था। 9 जनवरी आखिरी तारीख दी गई, लेकिन व्यापारी सहमत नहीं हैं और खुलकर यह लड़ाई लड़ने के मूड में हैं।

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