नेशनल बोर्ड ऑफ ट्रेड मेंबर से आरतिया का संवाद:कारोबारियों की प्रमुख समस्याओं पर हुआ मंथन, कहा- भारत में बनी वस्तुओं के उपयोग किया जाए

अखिल राज्य ट्रेड एंड इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आरतिया) के वरिष्ठ पदाधिकारियों और राजस्थान के दिग्गज कारोबारियों ने भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय के अधीन कार्यरत नेशनल बोर्ड ऑफ ट्रेड की सम्मानित सदस्य डा स्मिता शाह से संवाद कर कारोबारी समुदाय के समक्ष चल रही प्रमुख समस्याओं पर मंथन किया। टीम आरतिया की ओर से संवाद में कमल कंदोई, आशीष सर्राफ, जसवंत मील, अजय गुप्ता, कैलाश शर्मा, ओ पी राजपुरोहित, सज्जन सिंह, डा रवि गोयल, योगेश बंसल, पंकज गोयल, सुमित विजय, आयुष जैन, कैलाश खंडेलवाल, एच एम जौहरी, कैलाश खंडेलवाल समेत अनेक कारोबारी उपस्थित थे। डॉ स्मिता शाह ने जानकारी दी कि नेशनल बोर्ड ऑफ ट्रेड के प्लेटफार्म पर हर सोमवार दोपहर तीन बजे से चार बजे के बीच आनलाइन संवाद आयोजित किया जाता है, जिसमें वाणिज्य मंत्रालय समेत नौ प्रमुख सरकारी विभागों के अधिकारी मौजूद रहते हैं। इस बैठक में समस्याओं और मुद्दों का व्यवहारिक समाधान गतिशील होता है। उनका कहना था कि भारत सरकार ने एक योजना स्वीकृत की है, जिसके तहत बीस लाख रुपए तक की उधार बैंकों से कोलेटरल फ्री मिलती है। इसके अलावा अनेक महत्वपूर्ण जानकारियां उन्होंने टीम आरतिया से शेयर की। भारत में बनी वस्तुओं के उपयोग हो संवाद कार्यक्रम में संगठित क्षेत्र की कंपनियों और आनलाइन ट्रेड के कारण खुदरा दुकानदारों के सामने आ रहे संकट पर चिंता व्यक्त की गई। सरकारी खरीद में आपूर्तिकर्ताओं द्वारा कम मूल्य का होने के कारण हो रही चीनी माल की आपूर्ति के बारे में बताया गया और यह आग्रह किया गया कि समस्त सरकारी खरीद में उन्हीं वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित हो, जिनका उत्पादन भारत में हुआ हो। जो सप्लायर्स चीनी माल की आपूर्ति कर रहे हैं, उन्हें ब्लैक लिस्ट किया जाये। एक मुद्दा बिग फोर कंसल्टेंसी कंपनियों को भारत व केंद्र सरकार में तकनीकी सलाहकार बनाए जाने का भी उभरा, जिसमें तीन तथ्य सामने आए। पहला तो यह कि ये मूलतः विदेशी कंपनियां हैं, दूसरे इनका मुख्य कार्य आधार अंकेक्षण है, फिर भी इन्हें तकनीकी सलाह के लिए हायर किया जाता है। तीसरी अहम बात इन कंपनियों की पहुंच सरकारी तंत्र में गहराई तक होती है और सरकार के गोपनीय डाटा व सूचनाएं भी इन की पहुंच में होते हैं, यह चिंताजनक स्थिति है। आरतिया ने सुझाव दिया कि केंद्र व राज्य सरकार की अनेक योजनाएं ऐसी हैं, जिनकी सामान्य उद्यमियों कारोबारियों तक तक जानकारी नहीं पहुंच पाती। केंद्र व राज्य सरकार के पास पंजीकृत व्यापारियों उद्यमियों की सूची होती है, ईमेल आईडी होते हैं उन तक सभी योजनाएं व अन्य संशोधन नियमित जाने चाहिए। इसी तरह भारत सरकार व राज्य सरकार के सूचना जनसंपर्क विभाग भी ये योजनाएं एक प्रभावी रोड़ मैप के जरिए संबंधित स्टेक होल्डर्स तक अनिवार्य रूप से पहुंचे, यह सुनिश्चित किया जाए।

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