नोएडा की तीन प्राधिकरण में लागू हुई एक इंडस्ट्रियल पॉलिसी:ई-नीलामी और इंटरव्यू का क्राइटेरिया तय , संशोधन के बाद लागू होगी यूनीफाइड पॉलिसी

नोएडा प्राधिकरण की 216वीं बोर्ड का आयोजन किया गया। बैठक में तीनों प्राधिकरण में एक समान औद्योगिक भूखंड आवंटन पॉलिसी को लागू कर दिया गया है। इसके अलावा यूनिफाइड पॉलिसी यानी आवंटन निरस्तीकरण, लीज डीड, कब्जा आदि संबंधित नीतियों में संशोधन के बाद लागू करने पर सहमति बनी है। फिलहाल भूखंड आवंटन का जो क्राइटेरिया लागू किया गया है। उसके तहत 8000 वर्गमीटर तक के भूखंड अब नीलामी के जरिए आवंटित किए जाएंगे। इस आवंटन में ये सुनिश्चित किया जाएगा कि उद्योग लगाने वाले इंटरप्रिन्योर्स को भी भूखंड आवंटित किया जाए न की किसी प्रॉपर्टी डीलर को। 8000 वर्गमीटर से बड़े औद्योगिक भूखंड का आवंटन आब्जेक्टिव क्राइटेरिया के आधार पर साक्षात्कार के जरिए आवंटन किया जाएगा। इस प्रक्रिया में मूल्यांकन और आवंटन में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।

दरअसल, पॉलिसी को एक बनाने के लिए कंसलटेंट कंपनी सार्क एंड एसोसिएट ने 35 अध्याय और 104 पेज की एक पॉलिसी तैयार की थी । इस पॉलिसी को ग्रेटरनोएडा के बोर्ड में रखा गया था। जिस पर मुख्य सचिव ने तीनों प्राधिकरण से अपने सुझाव मांगे थे। साथ ही एक प्रॉपर नीति तैयार कर प्रस्तुत करने के लिए कहा था। सीईओ नोएडा प्राधिकरण लोकेश एम ने बताया कि सुझाव को कंपाइल कर मुख्य सचिव को रिपोर्ट भेजा गया था। जिसके बाद शासन की ओर से ये निर्देश आए है। क्या पड़ी जरूरत
दरअसल तीनों प्राधिकरण की औद्योगिक नीति को एक समान इसलिए किया गया क्योंकि ये एक ही गौतमबुद्ध नगर जिले का हिस्सा है। यहां आने वाले निवेशकों को कंफ्यूजन न हो। अक्सर देखा गया है कि समय के साथ तीनों प्राधिकरण निवेश के अनुसार अलग-अलग कई अधिसूचनाएं और आदेश जारी करते है। जिससे विशिष्ट मामलों के लिए सही नीतियों की पहचान करना कठिन हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप अक्सर अधिकारियों को समान स्थितियों के लिए अलग-अलग नियम लागू करने पड़ते थे। पॉलिसी को एक समान करने का प्रयास 2010 में शुरू किया गया। इसके तहत तीनों प्राधिकरणों में पात्रता मानदंड, पट्टे की शर्त, किराया संरचना और सभी प्रकार औपचारिकताओं को एक समान करना था। जिसे तीनों प्राधिकरण में एक समान लागू किया जा सके। क्या किया गया लागू से 8000 वर्ग मीटर से अधिक के भूखंड के लिए होगा साक्षात्कार
8,000 वर्ग मीटर से अधिक के औद्योगिक भूखंडों के आवंटन की प्रक्रिया साक्षात्कार के जरिए होगी। जिसमें आवेदकों की एक स्क्रीनिंग समिति द्वारा पूरी तरह से जांच की जाएगी। जिसमें मानकों के अनुसार आवंटी को कुल 60 प्रतिशत अंक प्राप्त करना जरूरी होगा। इसमें सर्वाधिक योग्य और नंबर प्रतिशत हासिल करने वाले आवेदक को प्लॉट आवंटित किया जाएगा। यदि वो समय से प्लाट राशि का भुगतान नहीं करता तो उसकी पंजीकरण राशि के साथ आवंटन जब्त कर लिया जाएगा। 8000 वर्ग मीटर तक के प्लाट की ई नीलामी
8,000 वर्ग मीटर तक के औद्योगिक भूखंडों के लिए कंपनियों की जांच के बाद ई नीलामी की जाएगी। स्क्रीनिंग समिति आवेदकों के तकनीकी प्रस्तावों का मूल्यांकन करेगी। यदि वे 60% अंक की सीमा को पूरा करते हैं। वे आवंटन प्रक्रिया में शामिल होंगे। ऐसे मामलों में जहां तीन या अधिक आवेदक किसी भूखंड में रुचि रखते हैं तो ई-नीलामी की जा सकती है। यदि तीन से कम पात्र बोली दाता आवेदन करते हैं। इस स्थिति में आवेदन फेज को दो बार बढ़ाया जा सकता हे। प्रत्येक विस्तार सात दिनों तक चल सकता है। जिससे अतिरिक्त आवेदक भी इस प्रक्रिया में हिस्सा ले सकेंगे। इन विस्तारों के बाद यदि अभी भी तीन से कम बोली लगाने वाले हैं। इस स्थिति में प्रतिस्पर्धा के बगैर ही उच्चतम बोली लगाने वाले को भूखंड आवंटन किया जाएगा। किसी प्रकार का डिफाल्टर तीनों ही प्राधिकरण की किसी भी आवंटन में हिस्सा नहीं ले सकेगा।

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