प सिंहभूम जिले के चाईबासा में अवैध लौह अयस्क का कारोबार एक बार फिर पूरे शबाब पर है। नोवामुंडी और बड़ाजामदा इलाके में बंद और परित्यक्त खदानों को निशाना बनाकर प्रतिदिन हजारों टन लौह अयस्क की अवैध खुदाई और तस्करी की जा रही है। प्रतिदिन करीब 50 ट्रकों में आयरन ओर की निकासी हो रही है। बड़ाजामदा स्थित कोर मिनरल्स खदान, जिसकी लीज समाप्त होने के बाद वर्षों से बंद पड़ी है, अब अवैध खनन का मुख्य केंद्र बन चुकी है। खदान की चारदीवारी तोड़कर अंदर एक्सकेवेटर और हाइवा वाहन तैनात किए गए हैं। रात के अंधेरे में बड़े पैमाने पर उत्खनन कर अयस्क बाहर निकाला जा रहा है। बताया जाता है कि सिर्फ दो घंटे में 10 से 15 हजार टन फाइंस की खुदाई कर ली जाती है। इसके बाद अयस्क को स्थानीय क्रशरों में ले जाकर जाली कागजातों के सहारे “वैध” बनाया जाता है और फिर झारखंड के अन्य हिस्सों सहित बाहर भेज दिया जाता है। रोजाना 10 हजार टन की हो रही है ढुलाई प्रतिदिन करीब 10 हजार टन से अधिक लौह अयस्क की अवैध निकासी का दावा किया जा रहा है। अनुमान है कि इससे सरकार को प्रतिदिन लगभग 20 करोड़ रुपये तक के राजस्व का नुकसान हो रहा है। इस पूरे कारोबार में बड़े सिंडीकेट शामिल हैं। वन विभाग,थाना से लेकर सभी की मिलीभगत है। चांडिल और चौका से लेकर पश्चिम बंगाल तक जा रहा है अवैध तरीके से आयरन अवैध रूप से निकाले गए लौह अयस्क को चांडिल और चौका की फैक्टरियों में खपाया जा रहा है, जबकि कुछ खेप दुर्गापुर तक पहुंचने की बात सामने आई है। सड़क मार्ग से सुनियोजित तरीके से यह नेटवर्क संचालित हो रहा है। नोआमुंडी के काडेनाला स्थित बंद पड़े फाइंस डम्पिंग प्लॉट को भी निशाना बनाया जा रहा है। पुराने स्टॉक को निकालकर ट्रकों में भरकर बाहर भेजा जा रहा है। संगठित अवैध कारोबार की मैनेजमेंट और फील्ड लेवल की कमान संतोष डेबरा और अरविंद के हाथों में है। मशीनों की तैनाती, मजदूरों की व्यवस्था, ट्रकों की आवाजाही और अयस्क को बड़े प्लांटों तक पहुंचाने का पूरा समन्वय इन्हीं के इशारे पर किया जा रहा है।


