नौकरी और मुआवजा के लिए अनिश्चितकालीन आंदोलन पर बैठे ग्रामीण:कोरिया में 35 सालों बाद भी प्रभावितों को नहीं मिला मुआवजा, पहुंचे विधायक और अधिकारी

कोरिया जिले में SECL बैकुंठपुर अंतर्गत झिलमिली सह क्षेत्र में जमीन अधिग्रहण के 35 वर्षों बाद भी मुआवजा और नौकरी नहीं मिलने से आक्रोशित ग्रामीणों ने अनिश्चित कालीन धरना शुरू कर दिया है। यहां तीन गांवों के ग्रामीण SECL के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरने पर हैं। इससे कोयला परिवहन पूरी तरह से ठप हो गया है। आंदोलन के दूसरे दिन बैकुंठपुर विधायक भैयालाल राजवाड़े और SECL के अधिकारी मौके पर पहुंचे और आंदोलन कारियों से चर्चा की। ग्रामीणों ने फिलहाल ठोस पहल किए जाने तक आंदोलन जारी रखने का निर्णय सुना दिया है। एसईसीएल के झिलमिली सहक्षेत्र अंतर्गत पांडवपारा और झिलमिली भूमिगत खदानों के लिए जमीन अधिग्रहण वर्ष 1988-89 में किया गया था। इस कोल परियोजना से सोरगा और खोर पंचायतों के सैकड़ों ग्रामीण प्रभावित हुए थे। इनमें से करीब दो सौ ग्रामीणों को आज तक न तो नौकरी मिल सकी है और न ही मुआवजा। ये अधिग्रहण दोनों भूमिगत खदानों के आसपास के क्षेत्र, सड़क, रिहायशी इलाकों के लिए किया गया था। पहले भी प्रदर्शन, लेकिन सिर्फ आश्वासन मिला
प्रभावित ग्रामीणों ने पूर्व में कई बार प्रदर्शन किया, लेकिन अब तक न तो ग्रामीणों को मुआवजा ही मिल सका और न ही नौकरी। प्रदर्शनकारी ग्रामीणों ने बताया कि इससे पहले 21 दिसंबर 2024 को प्रदर्शन के दौरान स्थानीय विधायक भैयालाल रजवाड़े की उपस्थिति में 1 फरवरी को दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच के लिए शिविर आयोजित करने का आश्वासन मिला था। दो महीने बीत जाने के बावजूद शिविर में कोई समाधान नहीं हुआ, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश है। 1989 से लंबित है हक की लड़ाई
ग्रामीणों का कहना है कि 1988-89 में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुई थी। जुलाई 1992 तक अधिग्रहण पूरा किया गया। SECL प्रबंधन ने अधिगृहीत जमीन के बदले परिवार के एक सदस्य को नौकरी और उचित मुआवजा का आश्वासन दिया था। प्रभावितों में 200 से अधिक परिवारों में से सिर्फ कुछ को ही यह लाभ मिला, बाकी को ‘अपात्र’ बता दिया गया। ये है मांगें
1. अधिगृहीत 0.01 आरए भूमि के अनुपात में 40 वर्षों का रोजगार या उसके अनुसार जितनी आय होती है, उतना एकमुश्त मुआवजा।
2. बीते 35-36 वर्षों के नुकसान की भरपाई के लिए प्रति वर्ष 5 लाख रुपये का हर्जाना दें या जमीन लौटाई जाए।
3. 8 लाख रुपये प्रति डिसमिल या 2 करोड़ रुपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजा दिया जाए। विधायक और SECL के अधिकारी पहुंचे
आंदोलन के दूसरे दिन सोमवार शाम विधायक भैयालाल राजवाड़े और राजस्व व SECL के अधिकारी प्रदर्शनकारियों से चर्चा करने पहुंचे। हालांकि, प्रदर्शनकारियों से सार्थक चर्चा नहीं हुई। ग्रामीणों ने कहा कि वे निश्चित आश्वासन के बाद ही प्रदर्शन समाप्त करेंगे। झिलमिली सब एरिया मैनेजर आरएन मिश्रा ने कहा कि आंदोलन के कारण कोल उत्पादन प्रभावित नहीं हुआ है। कोयला उत्पादन पूर्ववत चल रहा है। लेकिन ट्रांसपोर्टिंग बंद हो गया है। हालांकि, अनुमान लगाया जा रहा है कि प्रदर्शन लंबा चला तो कोयला उत्पादन पर भी असर पड़ेगा, क्योंकि कोयला रखने की जगह नहीं बचेगी।

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