न प्रशासन जागा न निगम अमला ने सुध ली:बच्चे की मौत के बाद भी नहीं चेते… 100 से 150 रुपए में एक चकरी बिक रहा चायनीय मांझा

पचपेड़ी नाका में चायनीज मांझा से 7 साल के मासूम पुष्कर की रविवार को मौत हो गई। इसके बाद भी न प्रशासन जागा न निगम अमला ने सुध ली। सोमवार को मौत देने वाला एक चखरी चायनीज मांझा 100 से 150 रुपए में खुलेआम बिकता रहा। दाेपहर बाद हाईकोर्ट के संज्ञान लेने के बाद प्रशासनिक अमले ने छापेमारी की, लेकिन उसके पहले ही भास्कर ने तीन जगहों से चायनीज मांझा खरीदने का स्टिंग किया। प्रशासन ने हालांकि दो दर्जन जगहों पर छापेमारी कर चायनीज मांझा का बड़ा स्टॉक जब्त किया है, लेकिन बूढ़ापारा सहित कई इलाकों के प्रमुख कारोबारी दुकानों में ताला लगाकर गायब हो गए। माना जा रहा है कि छापे की खबर लीक हो गई थी।
सुबह जब प्रशासन की टीम ने छापेमारी शुरू नहीं की थी तब चायनीज मांझा आसानी से मिल रहा था। दुकान में जाकर सीधे चायनीज मांझा की मांग करने पर वे तुरंत दे रहे थे। दुकानकारों ने किसी तरह भी आनाकानी भी नहीं की। भास्कर की टीम ने तीन दुकानों में जाकर चायनीज मांझा लिया। 100 रुपए में एक चखरी मांझा मिली। तीनों जगह के दुकानदारों ने बताया वे बूढ़ापारा की दुकान वाले होलसेलर भी हैं। वहीं से उन्हें भी चायनीज मांझा मिलता है। हैरानी की बात है कि तीनों दुकानें दोपहर 12 बजे के बाद अचानक बंद हो गईं। आसपास वालों ने बताया कि रोज दुकान खुलती है, लेकिन आज पता नहीं क्यों जल्दी बंद हो गई। इधर, पुलिस बताया कि संतोषी नगर निवासी पुष्कर साहू की मौत की जांच शुरू कर दी है। घटना स्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे को खंगाले जा रहे है। आरोपी की तलाश की जा रही है। घटना स्थल के आसपास पतंग उड़ाने वालों की सूची बनाई जा रही है। गोलबाजार गोलबाजार के भीतर शनि मंदिर के पास संगम काइट सेंटर। दाेपहर 12.30 बजे। यहां पतंग और मांझे का थोक का कारोबार होता है। चिल्हर में भी सामान देते हैं। भास्कर की टीम जब यहां पहुंची तो दुकान बंद थी। आसपास के दुकानदार ने बताया कि सुबह दुकान खुली थी। लेकिन कुछ देर पहले ही दुकान बंद कर कारोबारी चला गया है। इसी तरह बूढ़ापारा की तीन दुकान भी बंद थी। भनपुरी भास्कर की टीम भनपुरी स्थित एक दुकान दोपहर करीब 1.45 बजे पहुंची। दुकान में कई तरह की पतंग टंगी थी। मांझे की चकरी भी लटकी थी। दुकानदार ने बताया कि मजबूत मांझा 100-150 रुपए तक है। उसने दावा किया कि इस मांझे से दूसरे की पतंग आसानी से काट लोगे। आपकी पतंग कभी कोई नहीं काट सकता। दुकानदार ने कहा कि 150 वाला मांझा सबसे अच्छा है। इसमें कांच लगा है। उसने 150 रुपए में चायनीज मांझा दिया। अश्वनी नगर अश्वनी नगर ढलान की पतंग दुकान दाेपहर करीब 2.15 बजे। यहां मांझा बेचने के साथ चकरी में भी भरा जा रहा था। खाली चकरी लेकर बच्चे खड़े थे। वे मांझा भरवाने आए थे। दुकान में एक मशीन रखी हुई थी। उसमें चायनीज मांझा लगा था। उसी से चकरी में भरा जा रहा था। दुकानदार ने बताया कि 50-100 रुपए में मांझा चकरी में भरा जाता है। अगर मांझा लेना है तो 100-150 रुपए तक की चकरी है। 30 रुपए में सिर्फ मांझा भी है। उससे 30 रुपए देकर मांझा खरीदा गया। सामान्य मांझा 15-25 रुपए तक बिक रहा था। सीधी बात- अबिनाश मिश्रा, कमिश्नर ननि अब किसी को बेचने नहीं देंगे, कार्रवाई करेंगे प्रतिबंध के बावजूद चायनीज मांझा कैसे बिक रहा
-हाल के दिनों में शिकायतें बढ़ी हैं। बच्चे की जान चली गई? अब क्या करेंगे।
– उपायुक्त को जिम्मेदारी सौंपी है, अब बिकने नहीं देंगे। क्या कार्रवाई होगी
– लाइसेंस निरस्त कर कानूनी कार्रवाई करेंगे। चायनीज मांझा खरीदना-बेचना अपराध नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने साल 2017 से देश भर में नायलॉन या चायनीज मांझे की खरीद-ब्रिकी, स्टोरेज और इस्तेमाल पर पाबंदी लगा रखी है। आदेश का उल्लंघन करने पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 15 के तहत कार्रवाई की जाती है। इसमें 5 साल तक की जेल और 1 लाख तक का जुर्माना का प्रावधान है।

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