न सफाई, न रोशनी, न लोग, चौपट है चौपाटी:आमानाका शिफ्ट होने के दस दिन बाद भी नहीं शुरू हो पाई चौपाटी

एनआईटी चौपाटी को आमानाका शिफ्ट किए दस दिन हो चुके हैं, लेकिन नई जगह पर हालात अभी भी पूरी तरह अव्यवस्थित हैं। 60 दुकानों में से एक भी दुकान शुरू नहीं हो पाई है। जहाँ चौपाटी बनाई गई है, वहाँ सफाई पूरी नहीं है, रोशनी की व्यवस्था अधूरी है और इलाका इतना सुनसान पड़ जाता है कि न दुकानदार आने की हिम्मत कर रहे हैं और न ग्राहक। सारी व्यवस्था की जा रही है-महापौर मीनल चौबे महापौर मीनल चौबे का कहना है कि निगम की तरफ से सभी व्यवस्थाएँ तेजी से दुरुस्त की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि आमानाका में लाइट लगाई जा रही है, सफाई की व्यवस्था सुधारी जा रही है और जल्द ही चौपाटी को शुरू किया जाएगा। लेकिन मौके की तस्वीर फिलहाल कुछ और ही कहानी बयां करती है—अंधेरा, गंदगी, वीरानी और अधूरी सुविधाएँ दुकानदारों की चिंताओं को और बढ़ा रही हैं। 21 नवंबर को विवादों के बीच हटाई गई थी चौपाटी 21 नवंबर को चौपाटी की शिफ्टिंग भारी विवादों के बीच हुई थी। उस दिन कांग्रेस के नेता बुलडोजर के सामने बैठ गए थे, पुलिस और कांग्रेस के बीच जमकर झूमाझटकी हुई थी और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर सेंट्रल जेल भेजा गया था। इस हंगामे के बीच दुकानों की शिफ्टिंग तो हो गई, लेकिन नई जगह आज भी तैयार नहीं है। लगातार जारी है विपक्ष का विरोध विपक्ष लगातार इसका विरोध कर रहा है। चौपाटी हटाने के फैसले को कांग्रेस शुरू से ही मनमाना और जल्दबाजी में लिया गया बता रही है। कुछ दिन पहले इसका विवाद तब और बढ़ गया जब युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने विधायक राजेश मूणत के पोस्टर पर कालिख पोत दी। इस घटना में पुलिस ने युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष सहित कई कार्यकर्ताओं पर FIR दर्ज की, जिसके बाद युवा कांग्रेस और NSUI ने सरस्वती नगर थाने का घेराव किया। विरोधियों की मांग है कि चौपाटी विवाद की उच्चस्तरीय जांच समिति बनाई जाए, उन अधिकारियों पर कार्रवाई हो जिन्होंने पहले चौपाटी को अनुमति दी और अब उसे अवैध बता रहे हैं, और राजनीतिक दबाव में लिए गए फैसलों की जांच भी की जाए। कांग्रेस ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो वे मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे। 10 करोड़ खर्च करके बनी थी एनआईटी चौपाटी जिस चौपाटी को हटाया गया, उसी को विकसित करने में 10 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। सरकार बदलने के बाद भाजपा सरकार ने यहाँ नालंदा–2 विकसित करने का फैसला लिया और नवंबर 2025 में इसका टेंडर भी पूरा कर लिया, रायपुर की यह चौपाटी अब प्रशासनिक निर्णय से आगे बढ़कर राजनीतिक टकराव का बड़ा केंद्र बन चुकी है।

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