पंजाब में 1988 के बाद भयंकर बाढ़ आई हुई है। अब तक 3.88 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। ऐसे में लोगों की मदद के लिए सरकार ने पंचायतों से सहयोग मांगा है। पंचायत विभाग की तरफ से पंचायतों को कहा गया है कि जिन पंचायतों की जमीन विभिन्न प्रोजेक्टों में स्क्वायर हुई है। वहीं, उनके खाते में वह पैसा आया है, वह उस जमा मूल राशि में से 5 फीसदी राहत फंड भेजें। इसके लिए बकायदा प्रस्ताव पास करवाए जाए। लेकिन इस प्रोजेक्ट में पंचायतें दिलचस्पी नहीं ले रही हैं। ऐसी 288 पंचायतों में से 18 पंचायतों ने पैसे देने के लिए हामी भरी है, जबकि कुछ पंचायतों ने प्रोजेक्ट में सीधे इनकार कर दिया है। वहीं, जिन पंचायतों ने पैसे दिए भी है, वह खुद बाढ़ प्रभावित जिलों में शामिल है।
इन पंचायतों ने पेमेंट की ट्रांसफर जानकारी के मुताबिक 17 सितंबर तक राज्य के पांच जिलों में सिर्फ 18 पंचायतों ने पैसे दिए हैं। इसमें सबसे ज्यादा बाढ़ प्रभावित पठानकोट जिले की सात पंचायतें शामिल हैं। इनके पास 1,24,400 रुपए, गुरदासपुर की चार पंचायतों की तरफ से 8,95,910, अमृतसर की चार पंचायतों की तरफ से 5,90,761, तरनतारन की दो पंचायतों से 8,49,512 व फरीदकोट की एक पंचायत ने 40 हजार रुपए भेजे हैं। लुधियाना व मोहाली की कुछ पंचायतों की तरफ से प्रस्ताव पास कर दिए गए हैं, लेकिन अभी तक पैसे ट्रांसफर नहीं हुए हैं। पंचायतें जिले में मदद के लिए राजी पंचायत विभाग के अधिकारी पंचायतों को पैसे देने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। हालांकि सूत्रों की मानें तो कुछ पंचायत अपने जिले में मदद के लिए तो राजी हैं, लेकिन दूसरे जिलों को पैसे देने के लिए हामी नहीं भरी है। हालांकि सरकार की कोशिश है कि जहां से आसानी से पैसा मिल सकता है, उसे हर हाल में प्रयोग किया जाए ताकि इलाके का पूरा फायदा हो सके। हालांकि एक अधिकारी ने नाम न लिखने की शर्त पर बताया कि ऐसे राशि पहले भी मांग गई थी। जालंधर की पंचायतों ने साफ मना किया जालंधर की तीन पंचायतों से—दियांवाली पंचायत से 6.26 करोड़ रुपए के मुआवजे में से 31.3 लाख रुपए से अधिक, कुक्कड़ पिंड से 2.97 करोड़ रुपये के मुआवजे में से 14.8 लाख रुपये से अधिक और सरनाना से 1.41 करोड़ रुपये के मुआवजे में से 7.05 लाख रुपए मांगे गए थे। कादियांवाली के सरपंच लवप्रीत सिंह और अन्य सदस्यों ने BDPO को पत्र लिखकर इस मांग को गैरकानूनी करार दिया है। उन्होंने पंचायत राज अधिनियम की धारा 85 का हवाला दिया, जिसमें साफ कहा गया है कि यह राशि गांव के सार्वजनिक कल्याण और विकास कार्यों पर ही खर्च की जानी चाहिए। पंचायतों की मदद करनी चाहिए पंचायत यूनियन मोहाली के पूर्व प्रधान बलविंदर सिंह कुंभड़ा बताते हैं कि जब पंचायत भवन बना था, उस समय राशि जरूर मांगी थी, लेकिन उसके बाद पैसा नहीं गया। अब यह पहली बार इस तरह राशि मांगी गई है। सरकार को तो पंचायतों की मदद करनी चाहिए।


