पंजाब की महिला सिख प्रचारक का विरोधियों पर गुस्सा फूटा:बीबी दलेर कौर बोलीं- गुंडे इकट्‌ठे किए, स्टेज पर नहीं जाऊंगी; कार्यक्रम में विरोध हुआ था

सिख धर्म का प्रचार कर रहीं जालंधर की बीबी दलेर कौर का विरोधियों पर गुस्सा फूटा है। गुरदासपुर में दीवान (धार्मिक सभा) के दौरान सरेआम उनका विरोध किया गया। इसके बाद धमकी भी दी गई कि वह जहां भी प्रोग्राम करेंगी, उनका विरोध किया जाएगा। इसके बाद बीबी दलेर कौर ने सोशल मीडिया पर लाइव आकर कहा कि मेरी 3 साल की बच्ची है। 24 घंटे में सिर्फ 5 मिनट उसे देखती हूं। बाकी जिंदगी सिख धर्म के प्रचार-प्रसार पर लगा दी। फिर भी मेरे साथ ऐसा किया जा रहा है। दलेर कौर ने कहा- हर चीज बर्दाश्त करने की भी एक लिमिट होती है। गुंडे इकट्‌ठे किए थे। अब वह न तो स्टेज पर आएंगी और न ही धर्म प्रचार करेंगी। इस घटना से उनके मन को बहुत दुख पहुंचा है। बीबी दलेर कौर मूल रूप से जालंधर के नकोदर की रहने वाली हैं। वह ढाडी वार के जरिए सिख धर्म का प्रचार करती हैं। वह सोशल मीडिया पर भी एक्टिव रहती हैं, जहां उनके लाखों फॉलोअर्स हैं। विरोध का यह मामला 22 दिसंबर का है। अब उनके रिएक्शन के बाद यह घटना सुर्खियों में आ गई है। तख्त श्री दमदमा साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने बीबी दलेर कौर का समर्थन किया है। वहीं निहंग हरजीत सिंह रसूलपुर ने भी इसका विरोध किया है। विरोध की घटना को लेकर बीबी दलेर कौर ने क्या कहा… संगत-प्रबंधकों का कोई कसूर नहीं
दलेर कौर ने कहा- हमारा आज बाबा जीवन सिंह जी और चमकौर की गढ़ी के समूचे शहीदों की याद में पंजगराइयां में दीवान था। वहां हमारा जत्था था। गांव पंजगराइयां की संगत का कोई कसूर नहीं है। प्रबंधकों का भी कोई कसूर नहीं है। महाराज साहब की चमकौर की गढ़ी का इतिहास चल रहा था। मैंने गुरू गोबिंद सिंह महाराज का जिक्र किया कि जब वे चमकौर की गढ़ी को छोड़कर गए, महाराज ने नीला घोड़ा समेत सब कुछ भाई संगत सिंह को बख्शा। जो पढ़ा, पुरखों से सुना, वही बताया
दलेर कौर ने कहा- मैं अब भी यही कहूंगी, कि महाराज साहब ने कलगी घोड़ा भाई संगत सिंह जी को बख्शा। चमकौर साहिब भी समागम चल रहे हैं। आज साहिबजादों का शहीदी दिहाड़ा है। मन को इतना ज्यादा दुख लगा, मैं बाबा संगत सिंह जी का जिक्र किया। हमने जो पढ़ा, अपने पुरखों से जो सुना, अभी तक याद है। संगत से उठकर विरोध किया गया, फिर चले गए
बीबी दलेर कौर ने कहा- संगत से उठकर कहा गया कि भाई संगत सिंह को नहीं बख्शा था, भाई जीवन सिंह को कहो। हम वहां चुप हो गए। सामने दमदमी टकसाल वाले ज्ञानी तेजबीर सिंह बैठे थे। उन्होंने कहा कि आपने जहां से इतिहास छोड़ा, वहीं से शुरू करो, किसी ने कुछ नहीं कहना। ये लोग संगत से उठकर चले गए कि बाबा जीवन सिंह क्यों नहीं कहा। यह गंद मुझसे और बर्दाश्त नहीं होता
बीबी दलेर कौर ने कहा- ये सब हो गया। वो उठकर भी चले गए। मैंने तो कहा था कि हमें कुछ नहीं आता, आप लोग स्टेज पर आकर बोल लो। आपने ज्यादा पढ़ा है। आपको ज्यादा नॉलेज होगी। इसके बाद मैंने स्टेज से फतेह बुलाई। मैं इसलिए लाइव हुई हूं, हर चीज को बर्दाश्त करने की लिमिट होती है। इतना गंद, इतना कुछ मैंने आज तक बर्दाश्त कर लिया। अब नहीं मुझसे बर्दाश्त होता। परिवार वाले हैं, सब कुछ पंथ को समर्पित किया
दलेर कौर ने कहा- हम परिवार वाले हैं। हम स्टेज से आए, संगत ने सम्मान कर दिया। फिर वह रास्ते में खड़े कि विचार करना है। कैसा विचार करना है घेरकर। इन्होंने ये कहा कि जहां आपकी स्टेज लगेगी, वहां घेर लेंगे। मैं रो रही हूं तो इसे कमजोरी मत समझना। मेरी 3 साल की बच्ची है। जिस दिन से जन्मी है, एक दिन भी अपने साथ नहीं रखी। 24 घंटे में उसका सिर्फ 5 मिनट मुंह देखती हूं। मैंने सारा कुछ पंथ को समर्पित किया। रोज प्रचार-प्रसार के लिए घूमते फिर रहे हैं। बहुत सारी बीबियों को प्रचार से तोड़ा
दलेर कौर ने कहा- आपने बहुत सारी बीबियों को प्रचार से तोड़ा। बीबियां प्रचार नहीं करेंगी। इसके कसूरवार कोई और नहीं, आप हो। मुझे इसलिए लाइव होना पड़ा कि अब मुझसे नहीं होगा। मुझसे बर्दाश्त नहीं होता। जितने समागम होने थे, मैं सबसे माफी मांग लेती हूं। आए दिन नया कलेश करते रहते हो। हम इन्हीं कॉन्ट्रोवर्सी में रहें। धमका ही सकते हो, मैं स्टेज पर नहीं जाऊंगी
दलेर कौर ने कहा- एक चीज बर्दाश्त करने की होती है, अब हद पार हो गई है। अब हम और क्या कर लें। प्रचार आपको दिया, हमारी तरफ से फतेह है। जब तक ये चीजें साफ नहीं होतीं, मैं स्टेज पर नहीं जाऊंगी। आपने गुंडे इकट्‌ठे किए, लोग सच ही बोलते हैं। बात कोई और की और न बने, इसलिए मुझे ये सब बताना था। धमका ही सकते हो और तुम्हारे पल्ले क्या है?। हम साबित करने में लगे रहें। ज्ञानी हरप्रीत सिंह बोले- ये गलत, सलीके से बात करनी चाहिए थी
ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा- बीबी दलेर कौर के साथ हुआ दुर्व्यवहार बिल्कुल गलत है। ऐसी घटनाएं कौम के लिए घातक हैं। कथावाचकों को अपने ख्याल के मुताबिक इतिहास सुनाने के लिए मजबूर करना गलत है। पहले ही कौम के पास अच्छे प्रचारकों और खासकर बीबियों (महिलाओं) की कमी है। सलीके के साथ बैठकर भी बात की जा सकती है। शहीदों में बंटवारा करना सिख सिद्धांतों के उलट है। निहंग रसूलपुर बोले- शर्म से डूब मरना चाहिए
निहंग हरजीत सिंह रसूलपुर ने कहा- जो बीबी सिख प्रचारक हो, वह भी सेफ नहीं है। वह भी आंखों से आंसू गिराने के लिए मजबूर हो गई है। शहीदी दिनों में ऐसा करने को मजबूर करने वालों को डूबकर मर जाना चाहिए, चाहे वह कोई भी हो।

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