पंजाब की 28 लड़कियों को कराया गया मुक्त:संत सीचेवाल ने कराई युवकों की वापसी, बोले- मानव तस्करों से बचें लोग

राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल वर्ष 2024 के दौरान विदेशों में फंसे भारतीयों और खासकर असहाय बेटियों के लिए एक सच्चे मसीहा बनकर उभरे हैं। खासकर उन लोगों के लिए जो बेहतर रोजगार के अवसरों की तलाश में धोखेबाज एजेंटों का शिकार बन गए। विदेश मंत्रालय के सहयोग से, उन्होंने विदेश में फंसे अनगिनत परिवारों को उनके प्रियजनों से सफलतापूर्वक मिलाया है। 24 साल से लेबनान में फंसे पंजाबी गुरतेज सिंह हों या 12 साल से हांगकांग में फंसी भारत की बेटी या फिर अरब में बेची गईं बेटियां। उन्होंने जहां हर मामले को गंभीरता से उठाया है, वहीं उन सभी पीड़ित परिवारों का दामन थामा है, जो विदेश में फंसे अपने प्रियजनों को लेकर उनके पास पहुंचे थे। साल 2024 में संत सीचेवाल ने उन 17 पीड़ितों के परिवारों का समर्थन किया, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया था और विदेश में काम करने गए थे। उनके शवों को अंतिम संस्कार के लिए उनके परिवारों के पास लाए। मानव तस्करी की शिकार पंजाब की 28 से अधिक लड़कियों को दलालों के चंगुल से छुड़ाकर सुरक्षित वापस लाया गया। इस तरह वे करीब 27 ऐसे युवाओं को सुरक्षित वापस ले आए, जो भारत से रोजगार के लिए विदेश गए थे, लेकिन वहां एजेंटों के जाल में फंस गए थे। विदेश मंत्री के समक्ष उठाया मामला उनका सबसे महत्वपूर्ण कार्य रूसी सेना से युवकों की सुरक्षित वापसी था। फरवरी से मीडिया में छाया रूसी सेना में भारतीय युवाओं की भर्ती का मामला चरम पर था, जिनके परिवारों को इस दुख की घड़ी में कुछ भी पता नहीं था। उनके एक परिवार के संत सीचेवाल से मिलने के बाद मामला उन्हों ने खुद विदेश मंत्री जयशंकर के सामने लाया था। उन्होंने दिए गए पत्र के जरिए इन भारतीय युवाओं की सुरक्षित वापसी की भी पुरजोर मांग की थी। जिस कारण कठिन परिस्थितियों में फंसे इनमें अधिकांश युवा भारतीय सुरक्षित वापस लौट आए। विशेष रूप से, उत्तर प्रदेश के निवासी कन्हैया का शव, जिनकी रूसी सेना में सेवा करते समय दुखद मृत्यु हो गई थी। सीचेवाल के लगातार प्रयासों के कारण उनकी मौत की खबर के बाद कुछ ही दिनों में उनका शव भारत वापस लाया गया। बच्चों को विदेश भेजने से पहले करें पड़ताल- सीचेवाल आखिर में राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने एक बार फिर देशवासियों से अपील की है कि वे अपने बच्चों को विदेश भेजने से पहले पूरी जांच-पड़ताल कर लें। उन्होंने कहा कि विदेशों में मानव तस्करी एक बड़ा मुद्दा है जो पूरे भारत से जुड़ा है। जिसे जागरूकता से ही रोका जा सकता है। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि लड़कियों के अरब देशों में जाने के मामलों में कमी आना बड़ी राहत की बात है, लेकिन अभी भी इसके बारे में जागरूकता की बहुत जरूरत है, ताकि कोई लड़की इस मानव तस्करी का शिकार न बन सके।

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