पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक रिटायर पुलिस अधिकारी की पेंशन और रिटायरमेंट का पैसा एफआईआर के चलते रोके जाने को गैरकानूनी करार दिया है। कोर्ट ने सरकार को 2 महीने के भीतर सारी बकाया रकम जारी करने का आदेश दिया है। साथ ही यह भी कहा है कि अगर सरकार के पास कोई पुख्ता सबूत है, तो उसी समय में उसे पेश किया जाए। यह फैसला रिटायर्ड पुलिस अधिकारी इंद्रजीत सिंह की याचिका पर सुनाया गया। उन्होंने कोर्ट में कहा कि उनकी पेंशन और ग्रेच्युटी 2018 से लंबित है, जबकि वह जुलाई 2018 में रिटायर हो चुके हैं। हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी को सिर्फ एफआईआर के आधार पर सजा नहीं दी जा सकती, जब तक उस पर कोई आरोप तय ही न हुए हों। इस मामले में एफआईआर के बाद 2005 में चालान पेश हुआ था, लेकिन आज तक ट्रायल कोर्ट ने कोई आरोप तय नहीं किए। हाईकोर्ट के जस्टिस जगमोहन बंसल ने मोहाली के जिला एवं सत्र न्यायाधीश को इस पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि यह देरी पुलिस, सरकारी वकीलों या कोर्ट के कर्मचारियों की लापरवाही से हुई है। पहले ही एक केस में हो चुका बरी इंद्रजीत सिंह के वकील ने बताया कि उनके खिलाफ 2004 में 2 एफआईआर दर्ज हुई थीं, एक धोखाधड़ी और साजिश की, जिसमें वे पहले ही बरी हो चुके हैं, और दूसरी पंजाब आबकारी एक्ट के तहत दर्ज हुई थी, जो अब तक लंबित है। इस दूसरी एफआईआर में चालान 2005 में कोर्ट में पेश हुआ था, लेकिन उसके बाद 20 साल तक कोई सुनवाई नहीं हुई। पुलिस ने इस केस को एक्साइज विभाग को कम्पाउंड (समझौते) के लिए भेजा था, लेकिन विभाग ने साफ कर दिया कि कोई समझौता नहीं हुआ। सिर्फ एफआईआर लंबित होने से नहीं रोकी जा सकती पेंशन कोर्ट ने कहा कि केवल एफआईआर लंबित होने से किसी रिटायर्ड अफसर की पेंशन और रिटायरमेंट का पैसा रोकना कानून के खिलाफ है। सरकार को आदेश दिए गए हैं कि 2 महीने के अंदर सारी बकाया राशि जारी की जाए। अगर सरकार को लगता है कि इंद्रजीत सिंह दोषी हैं, तो वह उस अवधि में कोर्ट में पक्के सबूत पेश कर सकती है। अगर दोष साबित हो जाता है, तो कानून के मुताबिक सेवानिवृत्ति लाभों की स्थिति दोबारा तय की जाएगी।


