पंजाब में पनबस और पीआरटीसी कर्मचारियों का रोष आज चरम पर पहुंच गया है। यूनियन के अनुसार, कल शाम से ही कर्मचारियों और नेताओं की गिरफ्तारियां शुरू हो गई थीं, जिसके चलते माहौल और तनावपूर्ण हो गया। आज सुबह तक अमृतसर सहित पूरे सूबे में पनबस–पीआरटीसी यूनियन नेताओं की गिरफ्तारियां जारी रहीं। पुलिस ने सूबा जॉइंट सचिव जोध सिंह, सूबा जनरल सचिव शमशेर सिंह ढिल्लो, बलजीत सिंह गिल, बलविंदर सिंह राट, गुरप्रीत सिंह (मुक्तसर) के साथ-साथ बरनाला डिपो के तीन प्रमुख नेताओं, फरीदकोट डिपो के तीन नेताओं और श्री मुक्तसर साहिब के प्रतिनिधियों सहित कुल 20 से अधिक यूनियन नेताओं को गिरफ्तार कर लिया है । किलोमीटर स्कीम को लेकर बड़ा टकराव यूनियन ने इसका कारण बताते हुए कहा कि आज पंजाब सरकार पनबस में किलोमीटर स्कीम के तहत निजी मालिकों की बसों के टेंडर खोलने जा रही थी। यूनियन ने पहले ही घोषणा की थी कि वे इस स्कीम का पुरजोर विरोध करेंगे और टेंडर प्रक्रिया के दौरान गेट रैली व तुरंत बंद की कॉल दी जाएगी। यूनियन का आरोप है कि यह स्कीम धीरे-धीरे ट्रांसपोर्ट विभाग के निजीकरण की दिशा में उठाया जा रहा कदम है, जो कर्मचारियों के भविष्य के लिए खतरनाक है। यूनियन का आरोप—सरकार ने आंदोलन कमजोर करने के लिए नेताओं को पहले ही हिरासत में लिया नेताओं ने कहा कि सरकार ने आंदोलन को रोकने और निजी बसों को धक्केशाही के साथ लागू करने के उद्देश्य से यूनियन के प्रमुख नेताओं को पहले ही गिरफ्तार कर लिया, ताकि आज होने वाला विरोध प्रदर्शन कमजोर पड़े। लेकिन इस कार्रवाई ने कर्मचारियों के गुस्से को और बढ़ा दिया है। सभी डिपो बंद, बस सेवा ठप गिरफ्तारियों के विरोध में पनबस और पीआरटीसी यूनियन ने एक बड़ा फैसला लेते हुए पूरे पंजाब में सभी डिपो बंद करने की घोषणा कर दी है। इससे राज्यभर में बस सेवा बुरी तरह प्रभावित हो गई है। यूनियन से जुड़े अन्य नेताओं ने कहा कि सरकार उन्हें संघर्ष के लिए मजबूर कर रही है और विभाग में निजी मालिकों की बसें लगाकर स्पष्ट रूप से निजीकरण की राह पर बढ़ रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर गिरफ्तार यूनियन नेताओं को तुरंत रिहा नहीं किया गया, तो यूनियन इससे भी कड़े और राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करने को बाध्य होगी।


