पंजाब यूनिवर्सिटी की एनैक्टस एसएसबीयूआईसीईटी टीम ने ‘मिथार्च सीरीज’ के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण पहल की। नयागांव स्थित डेवलपिंग इंडिजिनस रिसोर्सेज-इंडिया (DIR-India) में वंचित महिलाओं के लिए मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता पर 81वीं कार्यशाला का आयोजन किया गया। डेवलपिंग इंडिजिनस रिसोर्सेज-इंडिया की सीईओ आशा काटोच ने कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में महिलाओं को संबोधित किया। उन्होंने मासिक धर्म से जुड़ी सामाजिक मान्यताओं और मिथकों पर खुलकर चर्चा की। काटोच ने महिलाओं को प्लास्टिक-आधारित सैनिटरी नैपकिन के स्थान पर कपड़े के पैड के उपयोग के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि सस्टेनेबल नैपकिन न केवल महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हैं, बल्कि पर्यावरण की सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। महिलाओं की भ्रांतियों को दूर किया एनैक्टस टीम की फैकल्टी एडवाइजर सीमा कपूर ने कार्यशाला के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह आयोजन महिलाओं में मासिक धर्म से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने और जागरूकता बढ़ाने पर केंद्रित था। कार्यशाला में महिलाओं को स्वास्थ्यकर एवं टिकाऊ विकल्पों को अपनाने की जानकारी दी गई, जिससे वे अपने स्वास्थ्य के साथ-साथ पर्यावरण की भी रक्षा कर सकें।


