पंजाब सरकार द्वारा बॉर्डर एरिया में शिक्षा विभाग में कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों को एक अतिरिक्त इंक्रीमेंट देने संबंधी जारी पत्र पर शिक्षक संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है। शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। यह पत्र विभिन्न अदालतों में दायर रिट याचिकाओं के तहत जारी किया गया है, लेकिन इसमें जो शर्तें जोड़ी गई हैं, उन्हें गैर-वाजिब और अनुचित बताया जा रहा है। सरकारी आदेश के अनुसार, अतिरिक्त इंक्रीमेंट का लाभ लेने वाले शिक्षक या कर्मचारी को अंडरटेकिंग देनी होगी कि वह पूरी सेवा अवधि बॉर्डर एरिया में ही कार्य करेगा। यदि किसी कारणवश वह कर्मचारी तबादले के जरिए बॉर्डर क्षेत्र से बाहर जाता है, तो उसे अब तक मिले इंक्रीमेंट की राशि ब्याज समेत वापस करनी होगी। शिक्षकों का कहना है कि यह फैसला न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि पहले से ही बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे बॉर्डर क्षेत्रों के कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव डालने वाला है। बंधुआ मजदूर बनाने जैसी शर्तें – शिक्षक संगठन
डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष विक्रमदेव सिंह, महासचिव महिंदर और वित्त सचिव अश्वनी अवस्थी ने कहा कि सरकार ने भले ही बॉर्डर एरिया स्कूलों के लिए अलग कैडर बना दिया हो, लेकिन वहां काम करने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने में पूरी तरह नाकाम रही है। उन्होंने कहा कि एक इंक्रीमेंट देने के नाम पर ऐसी शर्तें थोपना शिक्षकों को बंधुआ मजदूर बनाने जैसा है। बॉर्डर एरिया छोड़ने पर ब्याज समेत राशि वसूलने का फैसला स्कूलों की स्थिति सुधारने में किसी भी तरह सहायक नहीं होगा। टीचर होम और शहरों के बराबर HRA जरूरी
डेमोक्रेटिक मुलाजिम फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष जर्मनजीत सिंह और महासचिव हरदीप टोडरपुर ने कहा कि बॉर्डर क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए अनुकूल माहौल बनाना बेहद जरूरी है। उन्होंने मांग की कि पुलिस लाइनों की तर्ज पर बॉर्डर एरिया में ‘टीचर होम’ विकसित किए जाएं, ताकि जरूरतमंद शिक्षकों को सुरक्षित आवास मिल सके। साथ ही बॉर्डर पट्टी में कार्यरत शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों को बड़े शहरों के समान हाउस रेंट अलाउंस (HRA) दिया जाए। जिलों से भी उठा विरोध
अमृतसर जिला अध्यक्ष अश्वनी अवस्थी, गुरदासपुर के हरजिंदर वडाला, तरनतारन के प्रताप सिंह, फिरोजपुर के मलकीत और फाजिल्का के गुरविंदर सिंह ने संयुक्त रूप से कहा कि यदि सरकार वास्तव में बॉर्डर एरिया की शिक्षा व्यवस्था सुधारना चाहती है, तो उसे दंडात्मक शर्तों के बजाय प्रोत्साहन देने वाले फैसले लेने होंगे। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया, तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा।


