भास्कर न्यूज | हजारीबाग हजारीबाग की पावन धरा पर अष्टान्हिका महापर्व के अवसर पर आयोजित आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का चौथा दिन अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। बाल ब्रह्मचारी पंडित मनोज भैया के सान्निध्य में संपूर्ण वातावरण धर्ममय और भक्तिमय बना रहा। सुबह अभिषेक, शांतिधारा, पूजन व मंत्रोच्चार के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। पंडित मनोज भैया जी ने अपने प्रेरणा दायी प्रवचनों में सिद्धचक्र की महिमा का विस्तार से वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, संयम और साधना के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। चौथे दिवस के विशेष अवसर पर 64 ऋद्धि के महत्व पर प्रकाश डालते हुए पंडित श्रीजी ने बताया कि यह विधान आत्मा की शुद्धि, उन्नति और मोक्ष मार्ग की प्रेरणा देता है। बता दे की नगर गौरव संत शिरोमणि प्रमाण सागर जी की नगरी में आयोजित यह विधान आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बना हुआ है। श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और उमंग देखने को मिल रही है। टीकमगढ़ से पधारे मैजिशियन, संगीतकार राकेश जी तथा कोतमा से पुजारी व पंडित संगम जी एवं उनकी टीम द्वारा संपूर्ण कार्यक्रम का संचालन अत्यंत सुव्यवस्थित और अनुशासित ढंग से किया जा रहा है। जैन महिला समिति की सक्रिय भूमिका और उत्कृष्ट व्यवस्था विशेष रूप से सराहनीय रही। आयोजन के चौथे दिन भक्ति और सहभागिता अपने चरम की ओर अग्रसर है। आज प्रातः की शांति धारा ,अभिषेक करने का सौभाग्य निर्मल आनंद पटौदी, नीरज बबन वर्षा काला, किशन लाल सुनील संजय विनायका, अशोक बुलबुल मंजुला रारा को प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में टोनी मधु सेठी , सुमेर मंजू सेठी , कैलाश कुसुम पटौदी बने, जिसे पंडित मनोज भैया ने बहुत-बहुत साधुवाद दिया। जैन महिला समिति के अध्यक्षा प्रेमा टोंग्या व सचिव निर्मला लुहाड़िया ने विश्वास व्यक्त किया कि आगामी दिनों में यह आध्यात्मिक वातावरण और अधिक प्रभावी बनेगा।


