एमसीबी जिले के भरतपुर विकासखंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत गढ़वार का आश्रित ग्राम पटपरटोला घने वनांचल में स्थित है। यह गांव विशेष पिछड़ी पण्डो जनजाति के 314 लोगों का निवास स्थान है, जिन्हें संविधान और सरकारें ‘राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र’ कहती हैं। हालांकि, जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग है, क्योंकि गांव में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। पटपरटोला में विकास आज भी गांव की सीमा तक नहीं पहुंच पाया है। पीढ़ियां बीत गईं, सरकारें बदलीं और योजनाओं के नाम भी बदले, लेकिन इस गांव की पंडो जनजाति के जीवन में सड़क की स्थिति आज भी जस की तस है। यह गांव आज भी उस भारत की तस्वीर पेश करता है, जहां बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। उच्च अधिकारी पर ध्यान नहीं देने का आरोप गांव में सड़क न होने के कारण बीमारी की स्थिति में इलाज मिलना मुश्किल हो जाता है। अस्पताल, एंबुलेंस और विभिन्न सरकारी योजनाएं कागजों तक ही सीमित रह जाती हैं, क्योंकि गांव तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है। बीमार बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों को आज भी कई किलोमीटर तक खाट, बांस या कंधों पर उठाकर ले जाना पड़ता है। गांव की शांति बाई ने बताया कि सड़क न होने से बरसात में कीचड़ में चलना पड़ता है। उन्होंने कहा कि सरपंच सड़क बनवाना चाहते हैं, लेकिन उच्च अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं देते। बारिश में पूरा गांव कीचड़ से भर जाता है। सड़क निर्माण की स्वीकृति की मांग एक अन्य बुजुर्ग ग्रामीण पुररू ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि गांव के बुजुर्ग इस कच्ची सड़क की बात कहते-कहते थक गए हैं। उनकी कोई सुनने वाला नहीं है और सरकार केवल वादे करके भूल जाती है। जिला पंचायत सदस्य सुखमंती सिंह ने बताया कि पटपरटोला में पण्डो जनजाति के लोग रहते हैं, लेकिन उन्हें आज तक सड़क जैसी बुनियादी सुविधा नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि केवल मौखिक रूप से इन्हें ‘दत्तक पुत्र’ कहा जाता है, लेकिन धरातल पर इनके लिए कुछ भी नहीं है, न सड़क है और न ही पीने का साफ पानी। सुखमंती सिंह ने सरकार से मांग की है कि सड़क विहीन गांवों में तत्काल सड़क निर्माण की स्वीकृति दी जाए, ताकि पण्डो जनजाति को बेहतर जीवन मिल सके।


