पटियाला में मिला अफ्रीकन स्वाइन फीवर का केस:गांव रावस ब्राह्मण को घोषित किया संक्रमित क्षेत्र,सुअर फार्मों और संबंधित वस्तुओं की आवाजाही पर प्रतिबंध

पंजाब के पटियाला में सुअरों में अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF) का केस सामने आया है। जिसके बाद गांव रावस ब्राह्मण का करीब 10 किलोमीटर एरिया तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है। पशुपालन विभाग के उप निदेशक द्वारा गांव को संक्रमित क्षेत्र प्रशासन ने घोषित किया है। तत्काल प्रभाव से सुअर फार्मों और संबंधित वस्तुओं की आवाजाही पर भी प्रशासन ने रोक लगा दी है। पटियाला की एडिश्नल डिप्टी कमिश्नर (देहात) ईशा सिंघल ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तत्काल प्रभाव से क्षेत्र में आवाजाही पर भी प्रतिबंध लगा दिए हैं। 31 जुलाई से 30 सितंबर तक लागू रहेंगे प्रतिबंध
प्रशासनिक जानकारी मुताबिक 31 जुलाई से 30 सितंबर 2025 तक लागू प्रतिबंधों के अनुसार, प्रभावित क्षेत्र से बाहर या प्रभावित क्षेत्र के बाहर से प्रभावित क्षेत्र में जीवित/मृत सूअरों (जंगली सूअर सहित), सूअर का मांस, चारा, कृषि संबंधी सामान/मशीनरी की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध है। 10 किलोमीटर एरिया को निगरानी क्षेत्र किया घोषित एडीसी द्वारा जारी आदेशों के अनुसार, राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान, भोपाल द्वारा जारी रिपोर्टों के आधार पर, रावस ब्राह्मण गांव में सामने आए मामले को देखते हुए, रोग के केंद्र से 0 से 1 किमी तक के क्षेत्र को संक्रमित क्षेत्र और 1 से 10 किमी तक के क्षेत्र को निगरानी क्षेत्र घोषित किया गया है। आगे के सर्वेक्षण, निगरानी और संभावित कार्रवाई के लिए जिला पशुपालन विभाग द्वारा इन क्षेत्रों की निरंतर निगरानी की जाएगी। जिला प्रशासन ने पटियाला निवासियों से अपील की है कि वे सरकारी निर्देशों का पूरी तरह पालन करें और इस बीमारी को फैलने से रोकने में सहयोग करें। निर्देशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अफ्रीकी स्वाइन फीवर कितना खतरनाक?
यह एक ऐसा संक्रमण है जो पालतू और जंगली सूअरों को प्रभावित करता है। इस बीमारी की मृत्यु दर 100% है यानी इससे संक्रमित होने पर किसी भी सूअर की जान नहीं बच पाती। अफ्रीकी स्वाइन फीवर इंसानों में नहीं फैलता है। यह बुखार एक जानवर से दूसरे जानवर में छूने या बॉडी फ्लुइड के जरिए फैलता है। अमेरिका के फूड एंड ड्रग एसोसिएशन (FDA) के अनुसार, सूअरों को कच्चा खाना खिलाने की वजह से भी वायरस का संक्रमण फैल सकता है। अफ्रीकी स्वाइन फीवर होने पर सूअरों में तेज बुखार, भूख न लगना, कमजोरी, त्वचा में लालिमा, फफोले, दस्त, उल्टी, खांसी और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण देखे जा सकते हैं। 6 दिन में हो जाती है मौत… अफ्रीकन स्वाइन फीवर अत्यधिक घातक संक्रामक रोग है, जिसमें पालतू सुअर और वाइल्ड बोर (जंगली सुअर) दोनों की ही 5 से 6 दिन के भीतर मौत हो जाती है। इस बीमारी में मृत्युदर सौ फीसदी है।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *