पढ़ाई और खेल गतिविधियां ठप: कॉलेज परिसर में शादी समारोह के लिए लगे टेंट

भास्कर न्यूज | बैकुंठपुर वैवाहिक सीजन की शुरुआत होते ही स्कूल और कॉलेज परिसरों के मैदानों में विवाह समारोहों का आयोजन तेज हो गया है। इसका सीधा असर न सिर्फ खेल गतिविधियों पर पड़ रहा है, बल्कि छात्रों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। मैदानों में टेंट, लाइट, साउंड सिस्टम और सजावट के कारण जहां खिलाड़ी अभ्यास से वंचित हो रहे हैं, वहीं शैक्षणिक माहौल भी लगातार बिगड़ता जा रहा है। यह समस्या जिले के कोरिया और एमसीबी जिला के शहर के कई शासकीय स्कूल-कॉलेजों के मैदान इन दिनों शादी-ब्याह के लिए बुक किए गए हैं। खेल मैदानों में अस्थायी पंडाल खड़े कर दिए गए हैं और देर रात तक तेज आवाज में डीजे व लाउड स्पीकर बजाए जा रहे हैं। इसके चलते शैक्षणिक संस्थानों के आसपास रहने वाले छात्रों को न तो पढ़ने के लिए शांत वातावरण मिल पा रहा है और ना ही खिलाड़ियों को अभ्यास का अवसर मिल रहा है। समस्या यहीं तक सीमित नहीं है। विवाह समारोहों के समापन के बाद मैदानों की हालत बद से बदतर हो जाती है। मैदान में टेंट लगने से ग्रुप डिस्कशन के लिए जगह नहीं रहती। छात्रों का कहना है कि कॉलेज में परीक्षा जैसे महत्वपूर्ण समय में अपेक्षित शांति नहीं मिल रही है। समारोह भले की रात में होता है, लेकिन कॉलेज कैंपस में टेंट लगने की वजह से मैदान में बैठने के लिए खाली जगह नहीं मिलती है। वहीं कई छात्रों ने बताया कि परीक्षा कक्ष तक आवाजें पहुंचने से प्रश्न-पत्र हल करने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। कुछ छात्रों ने इस संबंध में मौखिक रूप से आपत्ति भी जताई है। सेमेस्टर परीक्षा के दौरान ही विवाह समारोह चला शासकीय रामानुज प्रताप सिंहदेव पीजी कॉलेज और मिनी स्टेडियम बैकुंठपुर में यह समस्या सामने आई है। कॉलेज में सेमेस्टर परीक्षाओं के दौरान ही विवाह समारोह आयोजित किया गया। बताया जा रहा है कि आने दिनों में कॉलेज परिसर में शादी की तैयारियां और कार्यक्रम चलते रहेंगे। इस दौरान टेंट, लाइट और साउंड सिस्टम लगाए गए, जिससे परीक्षा देने आए छात्र-छात्राओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। शोर से प्रश्नपत्र हल करने में होगी है परेशानी किराए से मैदान दिया जाता है: प्राचार्य शासकीय रामानुज प्रताप सिंहदेव पीजी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. एमसी हिमधर ने बताया कि पूर्व प्राचार्य अखिलेश गुप्ता के समय से वैवाहिक कार्यक्रम के लिए मैदान किराए पर देने की परंपरा चली आ रही है। जनभागीदार में किराया जमा कर मैदान किराए से दिया जाता है। कार्यक्रम रात में होता है, इसलिए कॉलेज की पढ़ाई प्रभावित नहीं होती है।

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