जिले भर में मकर संक्रांति पर्व उत्साह से मनाया जा रहा है। स्नान, दान-पुण्य और पतंगबाजी का दौर जारी है। मौसम भी पतंगां के अनुकुल है। हवां भी साथ दे रही है। युवाओं की टोलियों ने सुबह से ही पतंगों के साथ छतों पर अपना डेरा जमाया है। बच्चे और युवाओं के साथ बडे़ बुजुर्ग भी जमकर पतंग के दांव पेच लड़ा रहे है। सुबह से ही पतंगबाजी की खींच और ढील के बीच वो काटा वो मारा का शोर गूंज रहा है। डीजे पर बजते फिल्मी और राजस्थानी गानों की धुनों के बीच पतंगें ठुमकती रहीं और पेंच लड़ते रहे। पतंगबाजी के दौरान ही पकौडिय़ों और चाय का दौर भी चलता रहा। सुबह से ही छतों पर तेज गानों की आवाज गूंजने लगी। महिलाएं मंदिर की ओर गई। गायों को हरा चारा डाल रही थी। मंदिरों के बाहर दर्शन कर दान करने वालों की भी भीड़ रही तो दान लेने वाले भी वहीं जमा थे। कोई कपड़े दान में दे रहा था तो किसी ने फल दान किए। किसी ने सड़क पर ही फीणी और पकौड़ी के लिए भट्टी लगा दी। लोगों ने पेट भर कर गर्मा गर्म पकवानों का आनंद लिया। लोगों ने पतंगबाजी के साथ मीठे पकवान और भोजन का स्वाद भी छतों पर ही चखा। युवतियां और महिलाएं भी पीछे नहीं रही। वे भी ग्रुप्स बनाकर पतंगबाजी का लुत्फ लेती नजर आई।


