दुर्ग डीआईसी व पीसीबी का कारनामा, पीएसयू में ऑक्शन व टेंडर के तय मानकों को पूरा करने के लिए साठगांठ दुर्ग जिले में कैमिकल प्रोडक्शन अब धांधली की फैक्ट्री बन चुकी है। पता वही, प्रोपराइटर वही। केवल नाम बदलकर कई बार उत्पादन क्षमता 700 तक बढ़ाई गई, ताकि रॉ-मटेरियल लेने के ऑक्शन में, सप्लाई का ठेका लेने व बैंक से लोन लेने में सहूलियत हो। इसमें पूरा सहयोग डीआईसी और पर्यावरण क्लियरेंस के अफसरों का रहा। उन्होंने न सिर्फ नियमों की अनदेखी की। बल्कि जांच रिपोर्ट भी सामने नहीं आने दी। इस दौरान एक्सपांशन की शर्तों का पालन नहीं हुआ है। दुर्ग में भिलाई स्टील प्लांट के कोकओवन से बड़ी मात्रा में कोलतार निकलता है। ये कैमिकल फैक्ट्रियों के लिए रॉ मटेरियल है। इसे ज्यादा मात्रा में ले सकें, इसके लिए पूरा खेल रचा गया। कुछ कंपनियों को बिना वेरीफाई किए ही पर्यावरण क्लियरेंस दे दिया गया। कैमिकल फैक्ट्री में बना पिच प्रोडक्ट एल्यूमिनियम फैक्ट्री के लिए कैथोड-एनोड का काम करता है। नैप्थालेन बॉल और पाउडर का भी बड़ा बाजार है। इसका व्यापार करोड़ों रुपए का है। डिपो बनाया, आसपास की सरकारी जमीन पर कब्जा इन नियमों की हुई अनदेखी तीस हजार की नौकरी करने वाला गोविंद मंडल 5 फैक्ट्रियों में डायरेक्टर, सवाल: इतना पैसा आया कहां से ये तरक्की चौंकाती है: प्लॉट 17N, हेवी इंडस्ट्रियल एरिया में एसएस उद्योग फैक्ट्री थी। जिसे गोविंद मंडल द्वारा खरीदने के बाद इसका नाम टेथिस कर दिया। उत्पादन क्षमता 2024 में 700% तक बढ़ी। जानकारों के मुताबिक अफसरों-नेताओं की अवैध कमाई को खपाया है। ईओडब्ल्यू की रडार पर है। कमेटी बनी, लेकिन रिपोर्ट दबा दी गई : इन तमाम मामलों की शिकायत हुई। इसकी जांच के लिए चार सदस्यीय टीम बनी। इस टीम में आरके शर्मा, अनीता सावंत, सुरेश चंद और गेडाम शामिल थे। भास्कर ने कमेटी के दो सदस्यों से बात की। उन्होंने डिटेल देने से मना कर दिया। कहा-ऊपर रिपोर्ट भेज दी है। पिच एल्युमिनियम फैक्ट्री में बड़े पैमाने पर होती है इस्तेमाल : कैमिकल फैक्ट्री में बनने वाले बड़े उत्पादों में पिच एल्युमिनियम कैथोड-एनोड के लिए इस्तेमाल होती है। वहीं नेप्थलॉन बॉल और पाउडर बनाया जाता है। साथ ही ऑइल और ब्लैक कार्बन पार्टिकल भी इसके प्रोडक्ट हैं। जो काफी महंगा बिकता है।


