मुरैना में सोमवार देर शाम रेत माफिया ने वन विभाग के अमले पर पथराव कर अवैध रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली को जबरन छुड़ा लिया। दरअसल, शाम के समय मुरैना के देवरी घड़ियाल केंद्र से वन विभाग का सशस्त्र अमला चेकिंग के लिए निकला था। टीम में वनरक्षक रवि तोमर राजघाट प्रभारी, बलवीर सिंह परमार सहित अन्य सुरक्षा कर्मी शामिल थे। नेशनल हाईवे क्रमांक 44 पर अंबाह बाइपास के पास विभाग को चंबल नदी की अवैध रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली दिखाई दी। वन विभाग की टीम ने ट्रॉली का पीछा करना शुरू किया। पीछा होते देख ट्रॉली चालक ने वाहन को तेज भगाने की कोशिश की। जल्दबाजी में उसने ट्रॉली को ट्रैक्टर से अलग कर दिया। ट्रैक्टर का संतुलन बिगड़ने से वह सड़क किनारे रेलिंग से टकरा गया, जिससे उसके दोनों आगे के पहिए टूट गए। वन विभाग की टीम जैसे ही मौके पर पहुंची, रेत माफिया के लोगों ने टीम को घेर लिया और पत्थर बाजी शुरू कर दी, जिससे वन विभाग की टीम को पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा। पथराव के दौरान माफिया ने वहां एक जेसीबी बुलाकर अवैध रेत से भरी ट्रॉली को उठाया और अपने साथ ले गए। रेत माफिया का बढ़ता प्रभाव
यह पहली घटना नहीं है जब रेत माफिया ने वन विभाग या प्रशासन के अमले पर हमला किया हो। चंबल क्षेत्र में अवैध खनन लंबे समय से एक गंभीर समस्या है। सरकार और प्रशासन की ओर से कई बार कार्रवाई के निर्देश दिए गए, लेकिन माफिया के हौसले अब भी बुलंद हैं। मुरैना और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोग रेत माफिया के डर से चुप रहते हैं। माफिया की आपराधिक प्रवृत्ति के चलते लोग खुलकर विरोध करने से कतराते हैं। उनका कहना है कि जब सरकारी अमला ही इनके सामने असहाय हो जाता है, तो आम नागरिक क्या कर सकते हैं? प्रशासन की कार्रवाई की जरूरत
रेत माफिया की इस घटना ने प्रशासन और वन विभाग की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों ने मांग की है कि माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। जरूरत है कि पुलिस और प्रशासन संयुक्त रूप से रेत माफिया के नेटवर्क को खत्म करें और दोषियों को कठोर दंड दिलवाएं। घटना के बाद राजघाट प्रभारी रवि तोमर ने बताया कि ट्रॉली का पीछा करते समय चालक ने तेजी से गाड़ी भगाई, जिससे उसका ट्रैक्टर रेलिंग से टकरा गया। हादसे के बाद टीम ने ट्रैक्टर को उठाने की जरूरत नहीं समझी। इसी दौरान माफिया ने मौका पाकर ट्रैक्टर-ट्रॉली को ले जाने की साजिश रची और पथराव किया।


