छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में पत्नी के रहते दूसरी शादी करने के मामले में कोर्ट ने पति को सुनाई है। कोर्ट ने आरोपी पति को 3 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। 6 साल तक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद पत्नी को न्याय मिला है। दरअसल, यह मामला कोंडागांव जिले के ग्राम माकड़ी का है। जहां नीता का विवाह हुआ था। शादी के बाद उसे पता चला कि उनके पति ईश्वर का पहले से ही किसी अन्य महिला से अवैध संबंध था। विरोध करने पर पति ने लगातार मारपीट और प्रताड़ना शुरू कर दी। कुपोषण का शिकार हुई महिला पीड़िता के अधिवक्ता भेष कुमार साहू का आरोप है कि पति ने नीता को खाना तक नहीं दिया। जिसके कारण वह कुपोषण का शिकार हुई और एक बीमार बच्ची को जन्म दिया। बच्ची जन्म से ही दोनों आंखों से दृष्टिहीन थी। उन्होंने बताया कि हार्ट में दो छेद थे और मुंह में भी विकार था। इसके बावजूद पति और ससुराल वालों ने मां-बेटी को घर से निकाल दिया और आरोपी ने दूसरी महिला से रायपुर के आर्य समाज में विवाह कर लिया। थाने में सुनवाई नहीं होने के बाद कोर्ट पहुंची पीड़िता थाने में शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई न होने पर नीता ने अधिवक्ता के माध्यम से द्वितीय विवाह का परिवाद प्रस्तुत किया। लंबे संघर्ष के बाद राजहरा न्यायालय के न्यायाधीश राहुल शर्मा ने आरोपी पति को 3 साल का सश्रम कारावास और 2 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। पत्नी के रहते दूसरी शादी करना क्राइम अधिवक्ता भेष कुमार साहू ने कहा कि विवाहिता पत्नी के जीवनकाल में दूसरी शादी करना भारतीय कानून के तहत दंडनीय अपराध है। यह फैसला उन सभी महिलाओं के लिए उम्मीद है। जो अन्याय के खिलाफ संघर्ष कर रही हैं।


