इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से 200 से ज्यादा लोग बीमार हो गए। बुधवार तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि, पुष्टि 4 की ही हुई है। हर मौत के पीछे कारण दूषित पानी ही सामने आया है। इनमें एक महिला की मौत झकझोर देने वाली है। रविवार रात उसकी तबीयत खराब होना शुरू हुई। उल्टियां होने के बाद लूज मोशन होने लगे। आधी रात से पति उसे संभालता रहा। सुबह तक उसकी हालत और ज्यादा खराब होती गई। कोई राहत नहीं मिलने पर पति उसे भाई की बाइक पर लेटाकर अस्पताल ले गया। जैसे-तैसे 7 किमी दूर अरबिंदो हॉस्पिटल पहुंचे। वहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। भागीरथपुरा में रहने वाले बिहारी कोरी का परिवार मूलत: पठारिया बोधा (सागर) का है। वे इंदौर में फर्नीचर की दुकान पर काम करते हैं। जिस महिला उमा कोरी की मौत हुई, वह भी नौकरी करती थी। यह कहानी सिर्फ एक महिला उमा की नहीं है। ऐसे ही हालात उनके साथ भी बने, जिनकी दूषित पानी पीने से मौत हो गई। पढ़िए, यह रिपोर्ट… रात 3 बजे उल्टियां शुरू हो गई महिला उमा कोरी रविवार शाम को घर पर थी। पति बिहारी कोरी काम से घर लौटते वक्त भागीरथपुरा में ही एक रेस्टोरेंट से बन रही जलेबी खरीदकर घर ले गए। रात को घर पर पति-पत्नी ने जलेबी खाई। यही जलेबी भाई और नीचे रहने वाले पड़ोसी को भी खिलाई। इसके बाद सभी ने भोजन किया और सो गए। रात करीब 3 बजे उमा को उल्टियां होना शुरू हुईं। इस पर दंपती ने पहले इसे सामान्य समझा, लेकिन बाद में लूज मोशन भी होने लगे। हालत ज्यादा खराब होने लगी। चूंकि रात को काफी ठंड थी, इसलिए पति ने उसे घर पर ही संभाला। फिर सुबह 9 बजे डॉक्टर को दिखाने की तैयारी की। हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। ऐसे में वे पास ही एक डॉक्टर के पास गए और उन्हें पत्नी की स्थिति से अवगत कराया। डॉक्टर ने उमा की हालत देखी और कहा कि लगातार उल्टियां और लूज मोशन होने से शरीर से काफी मात्रा में पानी निकल गया है। तुरंत अस्पताल ले जाइए। बिहारी ने आसपास अस्पताल ले जाने के लिए गाड़ी की कोशिश की, लेकिन नहीं मिली। आखिरकार उन्होंने भाई बाबू को बाइक से ही पत्नी उमा को लेकर अरविंदो अस्पताल चलने को कहा। तब तक उमा बेसुध स्थिति में पहुंच चुकी थी। दोनों उमा को जैसे-तैसे घर से बाहर लाए। सुबह के 11 बज चुके थे। बाबू ने बाइक चलाई और बिहारी ने उमा को बीच में लिटाकर दोनों हाथों से संभाला। जैसे-तैसे ट्रैफिक के बीच 7 किमी दूर अरविंदो अस्पताल पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने उमा को मृत घोषित कर दिया। मंगलवार को उमा का पोस्टमॉर्टम हुआ। इसके बाद परिजन शव लेकर पैतृक गांव पठारिया बोधा (सागर) रवाना हो गए। इनकी भी ऐसे ही गई जान… 1. मंजूला वाढ़े: रात में भोजन बनाया, सुबह मौत एक मामला भागीरथपुरा निवासी दिगंबर वाढ़े की पत्नी मंजूला (74) का है। परिवार में चार बेटियां हैं। सभी की शादियां हो चुकी हैं। दो बेटियां औरंगाबाद में हैं, जबकि दो इंदौर में अलग रहती हैं। कुछ दिन पहले औरंगाबाद निवासी बेटी इंदौर आई थी। सोमवार रात को मंजूला ने सभी के लिए भोजन बनाया। खाना खाने के बाद बेटी औरंगाबाद रवाना हो गई। इसके बाद आधी रात को मंजूला को उल्टियां होना शुरू हो गईं। साथ ही लूज मोशन भी हुए। पति ने उन्हें रात भर संभाला। सुबह होने तक हालत और खराब हो गई। उन्हें एमवाय अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। पति दिगंबर और बेटी योगिता सहित पूरा परिवार अचानक हुई इस मौत से स्तब्ध है। पति ने बताया कि पत्नी को कुछ साल पहले ब्रेस्ट कैंसर था, जो पांच साल पहले हुई सर्जरी के बाद पूरी तरह खत्म हो गया था। इसके बाद से वह स्वस्थ ही रही और पूरा कामकाज वही संभालती थी। भोजन बनाने तक वह पूरी तरह स्वस्थ थी। फिर आधी रात के बाद जो कुछ घटित हुआ, वह चिंतनीय है। वे खुद समझ नहीं पा रहे हैं कि यह क्या हो गया। 2. सीमा प्रजापत: तबीयत बिगड़ी, 5 घंटे बाद मौत इसी तरह 50 वर्षीय सीमा प्रजापत की मौत भी चौंकाने वाली है। भाई जितेंद्र ने बताया कि सोमवार तड़के 4 बजे उन्हें उल्टियां शुरू हुईं। साथ ही लूज मोशन भी हुए और हालत खराब होती गई। सुबह 9 बजे परिजन उन्हें हॉस्पिटल ले गए, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया। परिजनों का कहना है कि एक हफ्ते से क्षेत्र में जो पानी आ रहा है, उसमें ऐसा लग रहा था कि क्लोरिन या ब्लीचिंग की मात्रा ज्यादा है और ड्रेनेज की भी गंध थी। सीमा को किसी तरह की बीमारी नहीं थी। इससे पहले वह पूरी तरह स्वस्थ थी। 3. उर्मिला यादव: दो दिन बाद सामने आया सच उर्मिला यादव (70) को शुक्रवार शाम को उल्टियां होने के साथ लूज मोशन हुए। बेटे संजय ने बताया कि फिर सुबह उन्हें क्लॉथ मार्केट हॉस्पिटल में एडमिट किया गया। वहां वह एक दिन आईसीयू में रहीं और रविवार सुबह 11 बजे उनकी मौत हो गई। संजय का कहना है कि दूषित पानी के कारण उनका 11 माह का बेटा भी चाचा नेहरू अस्पताल में एडमिट है और उसकी हालत खराब है। परिजनों ने बताया कि वह पूरी तरह स्वस्थ थीं। उन्हें किसी प्रकार की कोई बीमारी नहीं थी। दूषित पानी के कारण उनकी हालत तेजी से गिरती गई। डॉक्टरों ने काफी प्रयास किए, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। मंगलवार देर रात शासन ने उनकी मौत दूषित पानी से होने की पुष्टि की। 4. तारा बाई और गोमती की भी मौत
भागीरथपुरा की तारा बाई कोरी (70) की भी दूषित पानी से मौत हुई। वह पहले स्वस्थ थीं। एक अन्य गोमती रावत की भी मौत हो गई। इसी तरह भागीरथपुरा के ही संतोष बिलोनिया की भी मौत हो गई। कुल मौतों में उर्मिला, तारा बाई और नंदलाल की मौत दूषित पानी पीने से हुई है, जबकि पांच में से अधिकांश पहले पूरी तरह स्वस्थ थे। 5. नंदलाल: दूषित पानी पीने बिगड़ी तबीयत
मंगलवार सुबह वर्मा हॉस्पिटल में नंदलाल पिता नाथूलाल (75) की मौत हो गई। उन्हें 28 दिसंबर को एडमिट किया गया था। दूषित पानी के कारण उनकी हालत खराब हो गई थी। डॉ. अभ्युदय वर्मा ने बताया कि वे ब्लड प्रेशर के मरीज थे। कई सालों से उनकी दवाइयां चल रही थीं, लेकिन वे नियमित रूप से नहीं लेते थे। उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया था। इस दौरान उन्हें सीपीआर भी दिया गया, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। उनकी मौत कार्डियक अरेस्ट से हुई है। शासन ने उनकी मौत दूषित पानी से होने की पुष्टि की। 6. जीवन लाल की भी दूषित पानी से गई जान
भागीरथपुरा में पानी की टंकी के पास रहने वाले जीवन लाल बरेडे की 28 दिसंबर को मौत हो गई थी। परिजनों का कहना है कि दूषित पानी पीने से उनकी तबीयत बिगड़ी थी। परिवार के दूसरे सदस्यों को भी अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था। उन्होंने गली के पीछे जमा गंदा पानी भी दिखाया। 7. अव्यान साहू: 5 माह के मासूम ने भी तोड़ा दम
भागीरथपुरा में बुधवार को 5 माह के अव्यान साहू समेत चार लोगों ने दम तोड़ा। अव्यान की मां का कहना है कि सरकार बच्चों की मौत क्यों नहीं बताती। निश्चित तौर पर और भी बच्चे दूषित पानी का शिकार हुए होंगे। परिजनों के मुताबिक, 5 माह के अव्यान को बाहरी दूध पिलाया जाता था। इसमें पानी मिला होता था। इंदौर नगर निगम ने बनाया कंट्रोल रूम
इंदौर नगर निगम ने शहर में नर्मदा जलप्रदाय व्यवस्था से संबंधित शिकायतों के लिए कंट्रोल रूम बनाया है। लोग इसके मोबाइल नंबर 7440443500 और 7440440511 पर संपर्क कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इस कंट्रोल रूम का प्रभारी उपयंत्री शलभ शर्मा को बनाया गया है। कंट्रोल रूम में चार कर्मचारी रोटेशन पर तैनात रहेंगे। मामले में संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जोनल अधिकारी शालिग्राम शितोले और प्रभारी असिस्टेंट इंजीनियर (पीएचई) योगेश जोशी को निलंबित कर दिया है। प्रभारी डिप्टी इंजीनियर (पीएचई) शुभम श्रीवास्तव की सेवा समाप्त कर दी गई है। तीन सदस्यों की जांच समिति बनाई गई है। इसके अध्यक्ष आईएएस नवजीवन पंवार होंगे। समिति में सुपरिटेंडेंट इंजीनियर प्रदीप निगम और मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शैलेश राय को भी शामिल किया गया है। सीएम ने मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपए की सहायता राशि देने की घोषणा भी की है। मामले से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… इंदौर में दूषित पानी से अब तक 10 मौत देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से अब तक 10 मौत हो चुकी हैं। 150 से ज्यादा लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए बुधवार शाम डॉ. मोहन यादव इंदौर पहुंचे। यहां अलग-अलग अस्पताल जाकर बीमार लोगों से मुलाकात की। पूरी खबर यहां पढ़ें… इंदौर में मौतें हो रही थीं…जिम्मेदार झूला झूल रहे थे इंदौर को देश के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा मिला हुआ है। इसके उलट भागीरथपुरा की गलियों में सबसे ज्यादा गंदगी है। यहां नालियों से नहीं, नलों से बीमारी बह रही है। दूषित पानी से 10 लोग मर चुके हैं। 149 लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। सड़कों पर स्वच्छता है, लेकिन पीने का पानी शौचालय से होकर गुजर रहा है। पूरी खबर यहां पढ़ें…


