इंदौर में 20 जनवरी को इवेंट फोटोग्राफर नितिन पडियार ने पत्नी, साली और सास की प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या कर ली थी। पुलिस ने परिजन और रिश्तेदारों के हंगामे के तीन दिन बाद आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा में केस दर्ज किया। एफआईआर नितिन के 14 पेज के सुसाइड नोट के आधार पर की गई, जिसमें उसने प्रताड़ना का जिक्र किया था। नितिन ने लिखा था कि ससुराल पक्ष ने उसके खिलाफ झूठे केस दर्ज कराए थे। हालांकि, यह इंदौर का ऐसा पहला मामला नहीं है। इस तरह के कई मामलों में युवक आत्महत्या कर चुके हैं, कई अन्य ऐसी ही स्थिति से जूझ रहे हैं। एक पीड़ित ने तो प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है कि बेटियां बहुत बचा ली गईं, अब बेटों को बचा लो। इससे पहले बेंगलुरु में एक AI इंजीनियर के सुसाइड का मामला सामने आया था। 34 साल के अतुल सुभाष ने 9 दिसंबर को 1:20 घंटे का वीडियो और 24 पेज का लेटर जारी कर कहा कि आत्महत्या के सिवा कोई उपाय नहीं बचा है। सुभाष ने पत्नी निकिता सिंघानिया, सास, साले और चचेरे ससुर को मौत का जिम्मेदार बताया। लेटर में लिखा कि पत्नी और सास ने उसे सुसाइड करने को कहा था। इंदौर में पुरुष अधिकारों और हितों के लिए संस्था ‘पौरुष’ पिछले 15 साल से आंदोलन चला रही है। नितिन पडियार केस में भी संस्था ने एकतरफा महिला कानून के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया था। दैनिक भास्कर ने संस्था से जुड़े सदस्यों से बात की तो उन्होंने अपना दर्द साझा किया, पढ़िए रिपोर्ट… भाई की शादी का बोलकर पत्नी मायके गई, फिर नहीं लौटी
संदीप मालवीय की शादी 2015 में भोपाल में हुई थी। शादी के वक्त उनकी नौकरी मुंबई में थी। फिर बेंगलुरु ट्रांसफर हो गया। संदीप का आरोप है कि शादी के बाद से ही पत्नी अधिकतर समय मायके में रहती थी। वहां तीन-तीन महीने रुकती थी। समझाने पर आत्महत्या करने और झूठे केस में फंसाने की धमकी देती थी। रात को अक्सर मोबाइल में लगी रहती थी और घर का कोई काम नहीं करती थी। अप्रैल 2019 में पत्नी भाई की शादी का बहाना बनाकर बेटी, सारा सामान और ज्वेलरी लेकर मायके चली गई। फिर मोबाइल बंद कर लिया। वॉट्सऐप, फेसबुक पर भी संदीप को ब्लॉक कर दिया। संदीप ने कई बार संपर्क करने की कोशिश की। ससुर, साले और रिश्तेदारों को भी कॉल किया, लेकिन पत्नी ने न तो कभी उनसे बात की और न ही बेटी से बात करने दी। इसके बाद उन पर दहेज और घरेलू हिंसा का केस लगा दिया। ये केस पत्नी ने मायके जाने के डेढ़ साल बाद लगाया। 2020 से उनकी कई पेशियां हो चुकी हैं। वहीं, पत्नी बड़ी मुश्किल से किसी पेशी पर उपस्थित होती है। साली ने अतुल सुभाष जैसा हाल करने की धमकी दी
संदीप का कहना है कि उन्होंने पत्नी को घर वापस लाने के लिए सेक्शन 9 (वैवाहिक संबंधों की पुनर्स्थापना) का केस भी दायर किया। इसकी डिक्री उनके पक्ष में हुई। कोर्ट ने पत्नी को अप्रैल 2023 में पति के साथ आकर रहने का आदेश दिया था, लेकिन वह आज तक साथ रहने नहीं आई। वह न तो बच्ची से मिलाती है और न ही बात करने देती है। अब पत्नी संदीप से तलाक चाहती है। 70 लाख रुपए की डिमांड कर रही है। पत्नी की वकील उसकी बहन ही है, जो एक राजनीतिक पार्टी से जुड़ी है। वह धमकी देती है, ‘अगर पैसे नहीं दिए तो तुम्हारा भी हाल अतुल सुभाष जैसा कर देंगे।’ संदीप का आरोप है कि पत्नी ने कोर्ट में शपथपत्र में झूठे तथ्य पेश किए हैं। इस पर उन्होंने कोर्ट में धारा 191 और 340 के तहत आवेदन दिया, लेकिन एक साल बाद भी कोई कार्यवाही नहीं हुई है। पत्नी द्वारा बताया गया पता भी सही नहीं है। जब वहां नोटिस भेजा जाता है तो पता चलता है कि वह वहां रहती ही नहीं है। संदीप बोले- मन में बार-बार आत्महत्या के विचार आ रहे हैं। पत्नी क्लासमेट थी, शादी के बाद घर से निकाल दिया
गौरव परमार ने बताया कि उनकी शादी जून 2016 में आर्य समाज से हुई थी। पत्नी क्लासमेट रही है। 2022 में उसने 498-ए, घरेलू हिंसा और 125 जैसी धाराएं लगवा दीं। वह उनके द्वारा खरीदी गई संपत्ति पर अपने परिवार के साथ रह रही है और गौरव को घर से बाहर निकाल दिया है। गौरव ने कहा कि वह पुलिस थाने और कोर्ट के चक्कर काटते-काटते परेशान हो चुके हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अनुरोध किया है कि बेटियां बहुत बचा ली गईं, अब बेटों को बचा लो। वह और उनका पूरा परिवार लगातार परेशानियों का सामना कर रहे हैं। संपत्ति हड़पने फर्जी कागज बनवाए, केस लगाया
किशोर मंडलोई ने बताया कि उनका विवाह 2013 में हुआ था। पत्नी आए दिन विवाद करती थी। 2020 में उन्हें घर से निकाल दिया। तब से वे किराए के घर में रह रहे हैं। पत्नी ने संपत्ति हड़पने के लिए उनके फर्जी साइन कर पेपर तैयार कराए। इसके बाद 2022 में उन पर और उनके माता-पिता पर 498-ए, घरेलू हिंसा और मेंटेनेंस का केस लगा दिया, जबकि उनके माता-पिता कभी भी उनके साथ नहीं रहे। उनसे सिर्फ फोन पर बात होती थी जबकि मां शादी से पहले ही लकवाग्रस्त हो चुकी थीं। भरण पोषण देने के बाद भी रिकवरी वारंट निकाला
जवाहर धिंगाना के विवाह को 25 साल हो चुके हैं। इनमें से 20 साल वे अपने माता-पिता से अलग होकर पत्नी के साथ रहे। दो बच्चे हैं। उन्होंने बताया कि आपसी विवाद के कारण पत्नी ने भरण पोषण का केस दायर किया। कोर्ट ने उन्हें 4,000 रुपए प्रति माह देने का आदेश दिया। उन्होंने समय पर 4,000 रुपए दिए और बच्चों का खर्च भी उठाया। उन्हें पढ़ाया। बालिग होने पर कोर्ट ने बच्चों का मेंटेनेंस बंद कर दिया। दोनों बच्चे पत्नी के पास हैं। इसके बाद भी उन पर भरण पोषण का केस दायर कर दिया गया। रिकवरी वारंट भी जारी कर दिया गया। चार तरह के टेररिज्म का शिकार हो रहे पति
संस्था ‘पौरुष’ के अध्यक्ष और एडवोकेट अशोक दशोरा का कहना है कि महिला स्वतंत्रता के नाम पर स्वच्छंदता, स्वेच्छाचारिता और व्यभिचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। महिलाओं के पक्ष में एकतरफा कानून से पुरुष चार तरह के आतंकवाद से ग्रस्त हैं। जब पत्नी घर में कलह करती है तो वह वीमेन टेररिज्म होता है। पति परेशान होकर जब थाने पहुंचता है तो पुलिस टेररिज्म शुरू हो जाता है। फिर झूठी एफआईआर दर्ज होने पर लीगल टेररिज्म चालू होता है। आखिर में केस कोर्ट में पहुंच जाता है तो ज्यूडिशियल टेररिज्म शुरू हो जाता है। महिलाओं के लिए 65 कानून, 18 तरह की हेल्पलाइन, हेलो डेस्क, आयोग, महिला थाने आदि हैं जबकि पुरुषों के लिए एक भी कानून और हेल्पलाइन नंबर नहीं है। देश में हर साल 1.64 लाख पुरुष प्रताड़ना से सुसाइड कर रहे
एडवोकेट अशोक दशोरा के अनुसार, देश में हर साल 1.64 लाख पुरुष इस तरह की प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या कर रहे हैं। दशोरा कहते हैं, ‘अवसादग्रस्त पति कभी अतुल सुभाष तो कभी इंदौर के नितिन पडियार की तरह सुसाइड कर लेते हैं। सभी पीड़ितों की गुहार है कि अवसादग्रस्त पुरुषों के लिए कम से कम एक हेल्पलाइन शुरू की जाए ताकि उनकी सुनवाई हो सके। साथ ही सरकार को भी सही डेटा मिल सके। देश में हर जेंडर के लिए समान कानून की जरूरत है। कानून में बदलाव के साथ पुरुष आयोग की जरूरत
समाज सेविका नीलम चावला का मानना है कि पुरुष की कमाई की सही उम्र 25 से 40 वर्ष की होती है। ऐसे में अगर वह इस तरह के झूठे केसों में फंसा होता है तो नौकरी या व्यवसाय नहीं कर पाता। उसका समय कानूनी लड़ाई में चला जाता है। अधिकांश महिलाएं बदले की भावना से केस दर्ज कराती हैं। पुरुषों की थाने पर सुनवाई नहीं होती। वहां टॉर्चर किया जाता है। ये पारिवारिक विवाद होते हैं, लेकिन पुलिस का तरीका उचित नहीं होता। पहले तलाक एक कलंक था और अब फैशन हो गया है। तलाक के बाद अगर बच्चा मां के पास है, तो पिता को उससे मिलने का अधिकार होना चाहिए। अगर कानून नहीं बदला तो पीड़ित युवक आत्महत्या ही नहीं, जघन्य अपराध करने पर उतारू हो सकते हैं। पुरुष आयोग भी बनना चाहिए। ये खबरें भी पढ़ें… सुसाइड नोट में लिखा-पत्नी और सास-साली मेरी मौत की जिम्मेदार इंदौर के बाणगंगा इलाके में एक युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। आत्महत्या से पहले उसने एक सुसाइड नोट लिखा, जिसमें पत्नी, सास और सालियों को अपनी मौत का जिम्मेदार बताया है। पुलिस के मुताबिक नितिन (28) पुत्र बाबूलाल पडियार, निवासी यादव नंद नगर को सोमवार रात परिवार के सदस्यों ने फंदे पर लटका हुआ पाया। पूरी खबर पढ़ें… बेंगलुरु में AI इंजीनियर का सुसाइड, पत्नी पर पैसों के लिए प्रताड़ना का आरोप लगाया बेंगलुरु में एक AI इंजीनियर के सुसाइड का मामला सामने आया। 34 साल के अतुल सुभाष ने 9 दिसंबर को 1:20 घंटे का वीडियो और 24 पेज का लेटर जारी कर कहा है कि उनके पास आत्महत्या के सिवा कोई उपाय नहीं बचा है। सुभाष ने पत्नी निकिता सिंघानिया, सास, साले और चचेरे ससुर को मौत का जिम्मेदार बताया। पूरी खबर पढ़ें…


