पद्म श्री सम्मान से अलंकृत प्रसिद्ध मांड गायिका बेगम बैतूल का अपने पैतृक गांव केराप पहुंचने पर ग्रामीणों ने गाजे-बाजे के साथ भव्य स्वागत किया। पद्म श्री सम्मान मिलने के बाद यह उनका पहली बार अपने मायके आगमन था, जिसे लेकर गांव में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। गांव पहुंचते ही ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा, पारंपरिक वेशभूषा और लोक संगीत के साथ बेगम बैतूल का अभिनंदन किया। उन्हें वर्ष 2025 में लोक कला और मांड गायकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्म श्री पुरस्कार प्रदान किया गया है। ठाकुरजी मंदिर में प्राप्त की थी मांड गायकी की शिक्षा
जिस मांड गायकी ने बेगम बैतूल को देश-विदेश में पहचान दिलाई, उसकी शिक्षा उन्होंने अपने मायके केराप गांव के ठाकुर जी मंदिर में ही प्राप्त की थी। भावुक क्षण उस समय देखने को मिले जब बेगम बैतूल उसी मंदिर परिसर में पहुंचीं, जहां से उनके संगीत सफर की शुरुआत हुई थी। इसी मंदिर में ग्रामीणों ने उनका सम्मान किया। भजन गाया तो नाचने लगे लोग
इस अवसर पर बेगम बैतूल ने मांड गायकी में “आओ म्हारा प्यारा गजानंद” भजन की प्रस्तुति दी, जिससे माहौल भक्तिमय हो गया और ग्रामीण भावविभोर होकर नाचने लगे।
स्वागत समारोह के दौरान बेगम बैतूल ने कहा कि देश-विदेश में अनेक स्थानों पर उनका सम्मान हुआ है, लेकिन अपने मायके और जन्मभूमि में मिला यह स्नेह और सम्मान उनके लिए सबसे खास है। उन्होंने सरपंच सुशील रोहलन सहित समस्त ग्रामीणों का आभार व्यक्त किया। सरपंच बोले- पूरे गांव के लिए गर्व की बात
सरपंच सुशील रोहलन ने कहा कि एक साधारण परिवार से निकलकर बेगम बैतूल ने अपनी कला के दम पर राजस्थान ही नहीं बल्कि देश और विदेशों में भी पहचान बनाई है, जो पूरे गांव के लिए गर्व की बात है।
उल्लेखनीय है कि बेगम बैतूल इससे पूर्व वर्ष 2022 में भारत के सर्वोच्च महिला सम्मान नारी शक्ति पुरस्कार से भी सम्मानित हो चुकी हैं। वे पद्मश्री और नारी शक्ति पुरस्कार प्राप्त करने के साथ ही चार महाद्वीपों में सम्मानित होने वाली पहली राजस्थानी महिला हैं। अब तक वे 29 देशों की यात्रा कर चुकी हैं और कई भारतीय दूतावासों में अपनी प्रस्तुतियां दे चुकी हैं।


