शहर को राहत देने वाली 50 ई-बसें दिसंबर तक सड़कों पर उतरनी थीं, लेकिन यह सपना नए साल का एक महीना बीतने के बाद भी अधूरा है। वजह बिजली कनेक्शन और उस पर फंसी अनुमति की फाइल है। धोल की पाटी में बने ई-बस डिपो के लिए 133 केवी बिजली कनेक्शन चाहिए। यह अब तक नहीं मिला है। यह कनेक्शन राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की अनुमति पर निर्भर है, क्योंकि बिजली लाइन को काया ग्रेड सेपरेटर के नीचे से अंडरग्राउंड ले जाना है। निगम ने 6 जनवरी को आवेदन किया था, लेकिन एनएचएआई ने फाइल पर पिछले सप्ताह ही काम शुरू किया। प्रक्रिया पूरी होने में 30 दिन लगना तय है। निगम आयुक्त ने कहा- एनएचएआई में अटकी अनुमति
“5 एकड़ में बना ई-बस डिपो लगभग तैयार है। सौर पैनल लगाने की तैयारी भी है। हाईवे क्रॉसिंग की अनुमति एनएचएआई के अधीन है। इसी के चलते प्रोजेक्ट अटका है।”
-अभिषेक खन्ना, निगम आयुक्त आयुक्त के बयान पर यह सवाल है कि जब डिपो समय पर बन सकता है तो जरूरी अनुमतियों की प्रक्रिया पहले क्यों नहीं की? राजस्थान पथ परिवहन निगम (रोडवेज) की तकनीकी लापरवाही का खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। डिपो कोड में आई गड़बड़ी के चलते ऑनलाइन टिकट बुकिंग बाधित है। सिस्टम में कई शहरों के कोड दिख ही नहीं रहे, तो कहीं एक ही शहर के दो-दो कोड सामने आ रहे हैं। परिचालक बसों में अपनी मशीन से टिकट तो बना रहे हैं, लेकिन सिस्टम में सीट दर्ज नहीं होने के कारण कन्फर्म सीट नहीं मिल पा रही। उदयपुर डिपो की हालत और भी चिंताजनक है। जहां रोज 14 हजार यात्री और 300 बसों का संचालन होता है, वहां टिकट व्यवस्था लगभग ठप है। बस स्टैंड के 6 में से 5 टिकट काउंटर बंद हैं। पूरा दबाव केवल काउंटर नंबर एक पर है। डिपो मैनेजर ने कहा- मामला आईटी विभाग से जुड़ा
“ऑनलाइन वही टिकट उपलब्ध होंगे, जिन डिपो और स्टैंड के कोड सिस्टम में दर्ज हैं। आईटी से जुड़ा मामला होने के कारण जानकारी आईटी विभाग ही दे सकता है।”
-हेमंत शर्मा, उदयपुर डिपो मैनेजर, रोडवेज डिपो मैनजर का यह बयान खुद सिस्टम की लाचारी और जिम्मेदारी से बचने की तस्वीर पेश करता है।


