हाई कोर्ट ने परकोटे (वॉलसिटी) में संचालित 19 कॉमर्शियल-कॉम्प्लेक्स के मामले में यथास्थिति के आदेश दिए हैं। हाई कोर्ट के आदेश से ही निगम ने इन कॉम्प्लेक्स को सील करने का नोटिस दिया था। जिसके बाद आज कॉम्प्लेक्स संचालकों द्वारा दायर प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश एमएम श्रीवास्तव और जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने यथास्थिति के निर्देश दिए। दरअसल, हाई कोर्ट के निर्देश पर गठित कमेटी ने परकोटे के हल्दियों के रास्ते व इसके आसपास के 19 भवनों को पूरी तरह से अवैध माना था। वहीं 12 भवनों को आंशिक तौर पर अवैध माना था। इन 19 भवनों में से कुछ में अवैध रूप से व्यवसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थी। वहीं कई ने वॉलसिटी के हेरिटेज से छेड़छाड़ की थी। जिसके बाद हाई कोर्ट ने इन कॉम्प्लेक्स को सील करने का आदेश दिया था। करीब 900 दुकानदारों को मिली राहत हाई कोर्ट के आज के आदेश से इन कॉम्प्लेक्स में संचालित करीब 900 शोरूम व दुकानों के व्यापारियों ने राहत की सांस ली हैं। निगम का नोटिस मिलने के बाद से ही यह व्यापारी आंदोलनरत थे। आज अदालत के आदेश के बाद हल्दियों का रास्ता व्यापार मण्डल के अध्यक्ष सुरेन्द्र बज ने कहा कि आज के आदेश से हमें काफी राहत मिली है। उन्होने कहा कि परकोटे में सालों से नीचे दुकान ऊपर मकान का कॉन्सेप्ट चला आ रहा है। इस तरह से तो परकोटे की हर दुकान पर ताले लग जाएंगे। वहीं अगर निगम को कार्रवाई करनी ही थी तो उस समय करते जब यह कॉम्प्लेक्स बन रहे थे। अब व्यापारियों ने मंहगे दामों में इनमें दुकानें और शोरूम खरीद लिए। हम नियमों के तहत ही व्यापार कर रहे है। इसमें हमारी क्या गलती हैं। हमारी सरकार से मांग है कि वह परकोटे में संचालित कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स को रेगुलाइज करें। हाई कोर्ट ने लिया था स्वप्रेरित प्रसंज्ञान
परकोटे में आवासीय भवनों में कॉमर्शियल गतिविधियों को लेकर हाई कोर्ट ने स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लिया था। वहीं रिहायशी क्षेत्र में अवैध निर्माण होना व व्यवसायिक गतिविधियों को संचालित करना कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन माना था। पिछली सुनवाई पर हाई कोर्ट ने इन भवनों को सील करते हुए निगम को 11 मार्च तक पालना रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा था।


