भास्कर न्यूज | भीलवाड़ा/भगवानपुरा स्टेट हाईवे-61 पर सज्जनपुरा के पास सोमवार सुबह 8:15 बजे करेड़ा से आ रही निजी बस ट्रैक्टर को ओवरटेक करने के प्रयास में मोड़ पर बेकाबू होकर पलट गई। बस 35 सीटर पास थीं, लेकिन हादसे के समय 55 यात्री सवार थे। दो दर्जन यात्री घायल हो गए। 19 घायलों को जिला अस्पताल रेफर किया। राहगीरों ने बस के शीशे तोड़कर यात्रियों को बाहर निकाला। प्राइवेट बस का करेड़ा से रवाना होने का समय सुबह 7:45 और भगवानपुरा पहुंचने का टाइम 8:25 बजे है। भीलवाड़ा पहुंचने का टाइम 9:25 बजे है। बस सोमवार सुबह 5 मिनट की देरी से 8.30 बजे भगवानपुरा पहुंची। बस यूनियन द्वारा भगवानपुरा कृषि मंडी चौराहा और करेड़ा में कर्मचारी तैनात हैं, जो समय पर नजर रखते हैं। करेड़ा से भीलवाड़ा जाने में 1 मिनट की देरी पर 50 रुपए की पैनल्टी होती है। ड्राइवर को डर था कि 5 मिनट की देरी पर 250 रुपए पैनल्टी लगेगी। इस कारण वह भगवानपुरा से निकलते ही बस 90 की स्पीड से भगाने लगा। केबिन में बैठे नारायण जाट ने बताया कि 3 मिनट में ही गाड़ी भगवानपुरा से 4 किमी दूर आ गई। ये यात्री हुए घायल… घायलों में राधेश्याम शर्मा जालिया द्वितीय बिजयनगर, सुगनलाल करेड़ा, लक्ष्मण गाडरी, श्रीनगर भीलवाड़ा, रामूदेवी बलाई मंडपिया मंगरोप, मांगीलाल गाडरी शाहपुरा, रामचंद्र सेन, कोशीथल रायपुर, गंगाराम गुर्जर निवासी पीलिया का झोपड़िया बीगोद, प्रभुलाल रैगर नगरी चित्तौड़गढ़, मोहनलाल तेली कालूखेड़ा चपरासी कॉलोनी भीलवाड़ा, प्रभु गुर्जर, बड़लियास, धन्नालाल तेली, अरणिया, गोवर्धनसिंह अरणिया शाहपुरा, नारायण जाट, करेड़ा, मोहम्मद शोएब भगवानपुरा, भैरू गुर्जर, भडाणी खेड़ा, भीलवाड़ा, नंदा रैगर, साडास चित्तौड़गढ़, कैलाश गाडरी मंगरोप और मांगू कुम्हार मंगरोप शामिल हैं। परिवहन विभाग ने भीलवाड़ा से मांडल, भगवानपुरा, करेड़ा, निंबाहेड़ा जाटान होते हुए गोरख्या तक बस संचालन के 12 परमिट जारी किए हैं, लेकिन हकीकत यह है कि बस संचालक केवल करेड़ा तक ही सवारियों को उतार देते हैं। इसके आगे बसें नहीं चलाई जा रही हैं। पार्षद पंडित अशोक शर्मा ने बताया कि वर्ष 2000 के बाद से आज तक एक भी बस गोरख्या गांव में नहीं गई। इसको लेकर ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों द्वारा परिवहन विभाग में कई बार शिकायतें दर्ज कराई गईं। धरना और चक्का जाम तक किए, लेकिन बसें गोरख्या नहीं आई। भीलवाड़ा से करेड़ा और देवगढ़ मार्ग पर संचालित होने वाली निजी बसों को चालक अक्सर जुर्माने के डर से ओवर स्पीड में दौड़ाते हैं।


