भास्कर न्यूज | अमृतसर एनसीबी जोनल यूनिट ने ड्रग तस्करी नेटवर्क का खुलासा करते ट्रामाडोल नामक मादक पदार्थ की अवैध खरीद फरोख्त में शामिल 2 आरोपी डाक्टरों को काबू किया था। आरोपियों को सोमवार को कोर्ट में पेश कर 2 दिन का रिमांड हासिल किया है। जिनकी परवीन कुमार और डा. राजेश कुमार के रूप में हुई है। कोर्ट में पेश किए जांच रिपोर्ट में एनसीबी ने बताया कि परवीन कुमार ने स्वीकार किया कि वह लाइफकेयर हॉस्पिटल का प्रबंधक था और उसे केवल 500 ट्रामाडोल टैबलेट्स तक रखने की अनुमति थी, लेकिन उसने इस सीमा का उल्लंघन करते हुए 59 बार 1000-1000 टैबलेट्स के ऑर्डर दिए। उसने यह भी बताया कि उसने 8 जून को मेडीपैरी लिमिटेड नामक कंपनी को लाइफकेयर हॉस्पिटल लीज पर देने का प्रयास किया, ताकि इस संपत्ति को मादक पदार्थों के अवैध व्यापार से अलग दिखाया जा सके। बता दें कि परवीन कुमार लाइफकेयर अस्पताल में मेडिकल स्टोर खोल रखा था। परवीन के खुलासे के बाद डा. राजेश कुमार को 5 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया। राजेश कुमार ने पूछताछ में बताया कि वह लाइफकेयर अस्पताल का डायरेक्टर है और उसे ट्रामाडोल की अवैध खरीद-फरोख्त की पूरी जानकारी थी। उसने बताया कि लाइफकेयर मेडिकेयर और कंठा हेल्थकेयर के माध्यम से इस अवैध व्यापार से हुई कमाई को सफेद किया गया। इस अवैध मुनाफे का एक हिस्सा बोधराज और राजेश कुमार तक पहुंचा। एनसीबी के मुताबिक फरार आरोपी परवीन कुमार को जांच में शामिल होने के लिए चार बार नोटिस जारी किए गए। यह नोटिस 2 मई, 2 जून, 14 जून और 8 जुलाई को भेजे गए थे, लेकिन इसके बावजूद वह जांच में शामिल नहीं हुआ। 4 सितंबर को एनसीबी ने नॉन-बेलेबल वारंट के लिए माननीय न्यायालय सुप्रीत कौर, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) के समक्ष आवेदन दायर किया। 8 सितंबर 2025 को न्यायालय ने परवीन कुमार के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया और 18 अक्टूबर 2025 को अदालत में पेश करने के निर्देश दिए। जिसके बाद 5 अक्टूबर को परवीन कुमार ने स्वयं एनसीबी कार्यालय ने सरेंडर कर दिया। राजेश कुमार ने यह भी खुलासा किया कि उसने परवीन कुमार और डा. बोधराज के साथ मिलकर अस्पताल की संपत्ति को 25 लाख रुपए प्रतिमाह पर लीज पर देने की गुप्त योजना बनाई थी, ताकि ड्रग तस्करी से हुई आय को वैध दिखाया जा सके। एनसीबी का कहना है कि यह मामला सिर्फ अमृतसर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार संभवतः राज्य के बाहर तक फैले हो सकते हैं। एजेंसी ने संकेत दिया है कि जांच के अगले चरण में फार्मास्युटिकल आपूर्ति श्रृंखला और संबंधित कंपनियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी। यह कार्रवाई 1 मई से 5 अक्टूबर तक कई चरणों में की गई, जिसमें बड़ी मात्रा में ट्रामाडोल टैबलेट्स जब्त की गईं और अस्पतालों के माध्यम से चल रहे इस अवैध कारोबार का भंडाफोड़ हुआ। 1 मई को एनसीबी ने हरिपुरा रोड स्थित बलिस्टा फार्मास्युटिकल्स पर छापा मारकर 31,900 ट्रामाडोल टैबलेट्स जब्त की। इस दौरान आरोपी अमित भंडारी को मौके से गिरफ्तार किया गया। इस संबंध में एनसीबी क्राइम नंबर 14/2025 के तहत एनडीपीएस एक्ट मामला दर्ज किया गया। फिर 2 मई को एनसीबी अधिकारियों ने फॉलो-अप कार्रवाई के दौरान लाइफकेयर मेडिकेयर अस्पताल, फतेहगढ़ चूरियां रोड से 472 ट्रामाडोल टैबलेट्स जब्त की। इस दौरान जांच के दौरान वहां मौजूद आरोपी परवीन कुमार मौके से फरार हो गया था। इसी दिन एक अन्य कार्रवाई में, कॉरपोरेट हॉस्पिटल बटाला रोड से 2 हजार ट्रामाडोल टैबलेट्स बरामद की गईं। इस मामले में अस्पताल के साझेदार राजन मल्होत्रा और जतिंदर मल्होत्रा को 3 मई को उनके बयान दर्ज करने के बाद काबू किया । एनसीबी अधिकारियों ने बरामद गोलियों को जांच के लिए सीआरसीएल, नई दिल्ली भेजा गया, शेष टैबलेट्स को कस्टम मालखाना, अमृतसर में सुरक्षित जमा किया गया। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार बरामद पदार्थों के निपटान की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई।


