परशुराम ने 21 बार पृथ्वी को जीत दान में दिया

भास्कर न्यूज | कवर्धा विप्र भवन कवर्धा में बुधवार को अक्षय तृतीया पर भगवान परशुराम का अवतरण दिवस मनाया गया। भगवान परशुराम की पूजा के बाद विद्वानों ने उनके शौर्य, वीरता और त्याग की कथा सुनाई। बताया गया कि वे भगवान विष्णु के छठे अवतार थे। उनका जन्म विप्र वंश में हुआ था। पिता ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका थीं। वे पितृभक्त थे। उन्होंने 21 बार पृथ्वी जीतकर दान दी थी। उनका युद्ध अन्याय, अत्याचार और अधर्म के विरुद्ध था। उनका उद्देश्य धर्म और न्याय की स्थापना था। वे सप्त चिरंजीवी में से एक हैं। वे महान वीर, तपस्वी, योद्धा और धर्मरक्षक थे। उनके शिष्यों में पितामह भीष्म, गुरु द्रोणाचार्य और महारथी कर्ण शामिल थे। वे शस्त्र और शास्त्र दोनों के ज्ञाता थे। कार्यक्रम में रेखा संतोष पांडेय, अध्यक्ष मनीष बंटी तिवारी, उपाध्यक्ष वेद नारायण तिवारी, सचिव सुरेश शर्मा, कोषाध्यक्ष सिद्धु तिवारी, वीके शर्मा, हरि शुक्ला, प्रभाकर शुक्ला, प्रमोद शुक्ला, नंद कुमार शर्मा, व्यास नारायण तिवारी, उमेश पाठक, शैलेंद्र उपाध्याय आदि लोग उपस्थित रहे। युवा ब्राह्मण समाज ने रखे 3 प्रस्ताव: युवा ब्राह्मण समाज के राजेश पांडेय ने तीन प्रस्ताव रखे। पहला, विप्र भवन के सामने भगवान परशुराम की मूर्ति स्थापना। दूसरा, भूमि दान देने वाली शकुन्तला बुआजी का चित्र लगाना। तीसरा, देश के लिए प्राण देने वाले शहीद नरेंद्र शर्मा का चित्र लगाना। साथ ही विप्र समाज के पूर्व अध्यक्षों के चित्र भी लगाने का प्रस्ताव रखा गया। सभी प्रस्तावों को सर्वसम्मति से स्वीकृति मिली।

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