मैं पलामू हुसैनाबाद प्रखंड के डूमरहथा गांव का हूं। मैंने 2016 से ग्रेजुएशन के बाद नौकरी करना पसंद नहीं किया। खेती को व्यवसाय बना कर काम प्रारंभ किया। मैं सात एकड़ में हाई वैल्यू फॉर्मिंग (ऐसी खेती जिसमें कम जगह और लागत में अधिक मुनाफ हो) करता हूं। इसमें काला आलू, ब्लैक राइस, रेड राइस, ब्लैक हल्दी, रामदाना, चिया सीड, काला नमक, किरण राइस, शुगर फ्री राइस, सोनमती आटा, ब्लैक आटा, पिपरमिंट ऑयल, तुलसी ऑयल जैसे दुर्लभ और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद शामिल हैं। इसके लिए हर्बल तेल निकालने की मशीन भी स्थापित की है। हमारे यह प्रोडक्ट आमतौर पर राज्य और राज्य के बाहर लगने वाले कृषि मेले में बिकते हैं। क्षेत्र के 600 किसान एफपीओ (फॉर्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन) से हम जुड़े हुए हैं। डूमरहथा सहित आसपास के गांव में 20 एकड़ से अधिक जमीन पर कई वेराइटी की खेती वैज्ञानिक विधि से कर रहे हैं। असम के जोहा धान की कर रहे खेती हाल ही में असम से जोहा धान लाकर उसकी सुगंधित खेती की शुरुआत की है। जो बासमती चावल से भी अधिक सुगंधित और स्वादिष्ट माना जाता है। साथ ही औषधीय सब्जी कंटोला (खेक्सा) की भी व्यावसायिक खेती शुरू की है। जिससे प्रति वर्ष आठ से दस लाख की आमदनी होती है। हुसैनाबाद अनुमंडल क्षेत्र के डुमरहथा गांव किसानी क्षेत्र में अव्वल हो गया है। इस क्षेत्र के किसान मुझसे जानकारी ले कर खेती करने में जुटे हैं। खेती के बल पर ही वे अपने बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए बाहर भेज कर पढ़ा रहे हैं। किसान पलायन न कर खेती से अपने परिवार का बेहतर भविष्य बनाने में जुटे हैं। मैंने केवल अपने लिए ही नहीं बल्कि अपने क्षेत्र के अन्य किसानों को ऑर्गेनिक खेती के लिए प्रेरित किया है। मेरी पहल पर राज्य सरकार ने डूमरहथा गांव में पिपरमिंट तेल मिल की स्थापना कराई है। फसलों की लगाते हैं, पुरस्कार से मिलती है सराहना मेरे इस नवाचारी पहल को देखते हुए झारखंड सरकार ने पलामू के मेदिनीनगर में आयोजित किसान मेले में 25 हजार रुपए का पुरस्कार भी दिया। पलामू के तत्कालीन आयुक्त जटाशंकर चौधरी भी कई बार हुसैनाबाद पहुंचकर कृषि प्रयोगों को देखा। असम की राजधानी गुवाहाटी में 23 से 29 जनवरी 2025 तक आयोजित राष्ट्रीय किसान मेला और फसल प्रदर्शनी में झारखंड के 25 प्रकार के ऑर्गेनिक और पोषक कृषि उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई। जिसे खूब सराहना मिली। जानिए… कौन हैं प्रियरंजन सिंह किसान प्रियरंजन सिंह ग्रेजुएशन के बाद से ही खेती में रम गए। उन्होंने सब्जी या पारंपरिक धान-गेहूं से हटकर प्रायोगिक खेती में हाथ आजमाया। ये दो भाई हैं। इनके परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैं। दोनों बच्चे रांची में पढ़ाई करते है। प्रतिवर्ष ये राज्य और राज्य के बाहर लगने वाले किसान प्रदर्शनी में जाते हैं। वहां अपने हाई वैल्यू फॉर्मिंग से उपजाए उत्पाद की प्रदर्शनी लगाते हैं। ये एफपीओ में भी शामिल हैं। इनकी खासियत है कि ये अपने प्रयोगों को आसपास के किसानों के साथ साझा करते हैं और अधिक मुनाफा वाली फसल लगाने के लिए प्रेरित करते हैं।


