श्याम किशोर पाठक | मेदिनीनगर जिले में बिना मान्यता के सैकड़ों स्कूल चल रहे हैं। कुल 350 विद्यालय का संचालन हो रहा है। शहर से लेकर गांव तक बड़ी संख्या में बिना मान्यता प्राप्त स्कूलों का संचालन हो रहा है। ताज्जुब की बात तो यह है कि साल दर साल ऐसे स्कूलों की संख्या और बढ़ती ही जा रही है, लेकिन किसी को इस बात की फिक्र ही नहीं कि स्कूल खोलने और चलाने के लिए सरकार ने कुछ नियम बना रखे हैं। इसके बाद भी विभागीय अधिकारी खामोश हैं। यह स्थिति तब है जब देश में शिक्षा का अधिकार कानून बने 15 साल और राज्य में इसे लागू हुए 13 साल हो गए हैं। अब भी कहीं एक कमरे में तो कहीं बरामदे और कहीं छत पर विद्यालय का संचालन किया जा रहा है। इसमें प्राथमिक स्तर के विद्यालयों की संख्या सबसे अधिक है। कुछ स्थानों पर तो कोचिंग का रजिस्ट्रेशन करवा कर भी लोग स्कूल चला रहे हैं। शिक्षा विभाग की ओर से अभियान चलाकर बिना मान्यता प्राप्त स्कूलों को बंद करने की बात कही जाती है, लेकिन असल में उनके द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाती। ऐसी स्थिति में नुकसान अभिभावकों को होता है। प्राइवेट स्कूल में अच्छी पढ़ाई के लोभ में वे वहां जाकर फंस जाते हैं। क्योंकि कम आय वाले लोग अपने बच्चों को बड़े निजी विद्यालयों में तो पढ़ा नहीं सकते।


