भास्कर न्यूज| खड़गपुर पश्चिम मेदिनीपुर और झाड़ग्राम जिले में सरस्वती पूजा की तैयारियां तेज हो गयी है। पूजा समितियों के साथ-साथ मूर्तिकार भी मां सरस्वती की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में पूरी तरह जुट गए हैं। खड़गपुर शहर के निवासी व मूर्तिकार राज सेनापति ने बताया कि वे 25 वर्षों से देवी-देवताओं की मूर्तियां बना रहे हैं। उनकी कलाकारी ने क्षेत्र में उन्हें विशेष पहचान दिलाई है। मूर्तिकार दिन-रात प्रतिमाओं को संवारने में लगे हुए हैं। राज का कहना है कि सरस्वती पूजा उनके लिए केवल एक काम नहीं, बल्कि आस्था का विषय है। वे हर साल बड़ी लगन और श्रद्धा से मां सरस्वती की मूर्तियों का निर्माण करते हैं। मिट्टी से मूर्ति गढ़ने से लेकर रंगा-रोगन और सजावट तक, वे हर चरण की स्वयं निगरानी करते हैं। वहीं मूर्ति निर्माण के साथ-साथ पूजा से संबंधित अन्य सामानों की दुकानों पर भी रौनक बढ़ गई है। पूजा समितियां समय रहते मूर्तियों की बुकिंग करा रही हैं, ताकि तय समय पर प्रतिमाएं स्थापित की जा सकें। वहीं इलाके के लोगों मानना है कि मूर्तिकारों और कलाकारों के कारण ही पारंपरिक कला आज भी जीवित है। वे नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत हैं, जो दशकों से अपनी मेहनत से आस्था को आकार दे रहे हैं। जानकारी हो कि मूर्तिकार मिट्टी और धान के पुआल से मूर्तियों को रूप दे रहे हैं। प्रतिमाओं की ऊंचाई दो फीट से लेकर नौ फीट तक है और उनकी कीमत 1500 रुपये से लेकर 10000 रुपये तक निर्धारित की गयी है। मूर्तिकार तय समय तक मूर्तियों को अंतिम रूप देने के लिए जुटे हुए हैं।


