पहाड़ी नगर पालिका में लगभग 15 लाख रुपये से अधिक के तीन महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों की निविदाएं जारी होने के 100 दिन बाद भी काम शुरू नहीं हो सका है। नियमानुसार इन कार्यों को 45 दिन के भीतर पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन वे अब भी केवल कागजों में ही अटके हुए हैं। नगर पालिका पहाड़ी ने वर्ष 2025-26 की निविदा सूचना संख्या 17 के तहत तीन कार्यों के लिए टेंडर आमंत्रित किए थे। इनमें जाटव समाज श्मशान में गेट व चबूतरा निर्माण, मुख्य बाजार चौराहे पर पुलिया-शौचालय निर्माण, और अंबेडकर पार्क में छतरीकरण व अन्य निर्माण कार्य शामिल हैं। इन तीनों कार्यों की अनुमानित लागत 15 लाख रुपये से अधिक है। निविदा नियमों के जानकारों के अनुसार, निविदा जारी होने की तिथि से 45 दिन के भीतर सभी कार्य पूरे हो जाने चाहिए थे। हालांकि, पहाड़ी नगर पालिका में यह समय सीमा काफी पहले ही बीत चुकी है। इस देरी को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद काम शुरू क्यों नहीं हुआ। आमजन में यह चर्चा है कि यह देरी प्रशासनिक कारणों से नहीं, बल्कि किसी सेटलमेंट या आपसी सहमति के अभाव के कारण हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि श्मशान, बाजार और पार्क जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर विकास कार्य ठप पड़े हैं। जनता यह सवाल उठा रही है कि क्या नगर पालिका में कार्य योग्यता के बजाय ‘सहमति’ से होते हैं, और क्या ‘सेटलमेंट’ के बिना विकास संभव नहीं है। इस संबंध में नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी ने बताया कि वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया है और कार्य शीघ्र शुरू होगा। उन्होंने देरी का कारण एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के आदेशों को बताया। हालांकि, स्थानीय सूत्रों के अनुसार एनजीटी के आदेश 20-25 दिन पहले आए थे, जबकि कार्य तीन महीने से अधिक समय से लंबित है।


