कृषि में संकट और तनाव को लेकर एमपीयूएटी में पांच दिवसीय कार्यशाला चल रही है हुई। इसमें किसानाें की कृषि आय बढ़ाने, जीराे बजट पर खेती, जलवायु परिवर्तन में उन्नत किस्म की खेती के ताैरे-तरीके बताए जा रहे हैं। देश के 12 राज्याें के दूरदर्शन और आकाशवाणी के 30 अधिकारी भी इस कार्यशाला में भाग ले रहे हैं। इन्हें विभिन्न सेमिनार, प्रगतिशील किसानाें से मुलाकात और कृषि विज्ञान केंद्र का निरीक्षण करवाकर खेती के ताैर-तरीके बताएं जा रहे है। इसके साथ ही किसानों को बिना कोई खर्च किए खेती करने के तरीके भी बताए जा रहे हैं। इसके बाद ये सभी इन जानकारियों का अपनी भाषा में अपने-अपने राज्य में प्रसारण करेंगे। इससे वहां के किसानों को नवीनतम कृषि तकनीकों की जानकारी मिल सकेगी। विवि से हुई जीरो बजट खेती की शुरुआत, अब इसे पूरे देश के किसानों तक पहुंचाएंगे किसानों की आमदनी बढ़ाने का लक्ष्य…प्रसार शिक्षा के निदेशक डाॅ. आरएल साेनी ने बताया कि इस कार्यशाला का उद्देश्य देशभर के किसानाें की आमदनी में बढ़ोतरी करना है। देश में जीराे बजट पर प्राकृतिक खेती की शुरुआत पहली बार एमपीयूएटी में ही की गई थी। अब इस तकनीक को देश के सभी किसानों तक पहुंचाने का लक्ष्य है। इसलिए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, कृषि तकनीकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान जोधपुर और राष्ट्रीय प्रसारण एवं मल्टीमीडिया प्रसार भारती नई दिल्ली के साझे में इस कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। तमिलनाडु, कर्नाटक, मणिपुर, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, गुजरात, मध्यप्रदेश, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, दिल्ली, असम, उड़ीसा आदि राज्याें के दूरदर्शन और आकाशवाणी के अधिकारी विवि में जुटे हुए है। सभी राज्य अपनी स्थानीय भाषा के आधार पर शाे शूट कर रहे है। कृषि की तकनीकाें का प्रसारण स्थानीय भाषा में करेंगे। बता दें कि इसके साथ ही वर्ष 2023 में प्राकृतिक कृषि पर अलग से बीएससी इन नेचुरल फार्मिंग पर काेर्स करने का जिम्मा भी एमपीयूएटी काे दिया गया था। इन विषयों पर तैयार होंगे शो


