पांच दिवसीय गायत्री महायज्ञ में युवाओ को वैदिक संस्कृति से जोड़ने पर दिया जोर

भास्कर न्यूज | चिरमिरी शहर के छोटा बाजार स्थित पानी टंकी परिसर में पांच दिवसीय मातृसत्ता श्रद्धा नौ कुंडीय गायत्री महायज्ञ का भव्य आयोजन किया गया। इस धार्मिक अनुष्ठान का शुभारंभ 19 जनवरी की सुबह 9 बजे भव्य कलश यात्रा के साथ शुरू हुआ। कलश यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर कलश धारण कर शामिल हुईं। वहीं श्रद्धालुओं ने गायत्री माता के जयघोष और भक्ति गीतों के साथ पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। यह आयोजन गायत्री परिवार चिरमिरी और शहर के श्रद्धालु नागरिकों के सहयोग से हुआ। महायज्ञ के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार, यज्ञ आहूतियों व प्रवचनों के माध्यम से धर्म, संस्कृति और नैतिक मूल्यों पर विशेष जोर दिया। आयोजन समिति ने बताया कि इस यज्ञ का मुख्य उद्देश्य समाज में फैल रही धार्मिक व सामाजिक बुराइयों को दूर कर शांति, सद्भाव और समृद्धि की स्थापना करना है। 20 जनवरी को संस्कार विवेचन व प्रज्ञा पुराण का आयोजन किया गया, जिसमें वक्ताओं ने जीवन में संस्कारों के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि अच्छे संस्कार व्यक्ति के चरित्र निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं और समाज को सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं। इस दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने प्रवचनों को ध्यानपूर्वक सुना और उन्हें अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। महायज्ञ के दौरान विशेष रूप से बच्चों और युवाओं को वैदिक संस्कृति से जोड़ने पर जोर दिया। आयोजकों ने बच्चों में धार्मिक, नैतिक और सामाजिक संस्कारों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपते हुए उन्हें सनातन परंपराओं के संरक्षण का संदेश दिया। कार्यक्रम का समापन 23 जनवरी को सामूहिक पूर्णाहुति व बसंत पंचमी पर आयोजित दीप यज्ञ के साथ हुआ। दीप यज्ञ के दौरान सैकड़ों दीपों की रोशनी से पूरा परिसर जगमगा उठा और वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। यहां बता दें कि इस पांच दिवसीय गायत्री महायज्ञ में पुंसवन, नामकरण, अन्नप्रसान, मुंडन, दीक्षा संस्कार जैसे धार्मिक कार्यक्रम भी संपन्न कराए गए। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

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