श्रीमती शीला शुक्ला के पुत्र श्रीशंकर शुक्ला की रिपोर्ट 80 फीसदी समर टूर रद्द जो गए थे वे भी लौट रहे जम्मू के रघुनाथ मंदिर में हम 8 मई को दर्शन करने पहुंचे थे। उस दिन गुरूवार था। शाम ढल चुकी थी करीब 7.45 बज रहे थे। अचानक जोर का धमाका हुआ और देखते ही देखते शहर की दुकानें बंद होने लगी। मंदिर से सभी दर्शनार्थियों को तुरंत बाहर निकलने को कहा गया। हम भौंचक्क थे। कारण पूछने की कोशिश की लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया। हमें बाहर निकालकर मंदिर के पट बंद कर दिए गए। हमारे देखते देखते ही पूरे शहर में अंधेरा छा गया। एक-एक दुकान, मकान और खंभों की लाइट बंद हो गई और जोर से सायरन बजने लगा। दर्शनार्थियों को कुछ समझ नही आ रहा था, फिर एकाएक हमले की आशंका से दिल दहल गया। हमारे साथ दूसरे दर्शनार्थी हिम्मत करके मंदिर प्रांगण से बाहर निकले। सड़क पर माहौल पूरी तरह से बदला हुआ था। लोग इधर से उधर भाग रहे थे। भारत-पाक जंग छिड़ गई
भगदड़ के बीच हम मंदिर के गेट में खड़े थे। इसी दौरान वहां रहने वाले एक युवक ने कहा- शायद भारत-पाकिस्तान के बीच जंग शुरू हो गई है। आप लोग डेंजर जोन में हो, जहां से आए हो तुरंत चले जाओ। लेकिन हम जिस गाड़ी को किराए पर लेकर मंदिर पहुंचे थे उसके ड्राइवर ने हौसला दिया। कहा- घबराओ मत ज्यादा दिक्कत होगी तो मेरे घर में रुक जाना, अगर ट्रेन है तो तुरंत निकल जाओ। एक टीटीई ने ट्रेन से उतारा, दूसरे ने 4 हजार लिए जम्मू स्टेशन में हमें जवानों ने राजधानी एक्सप्रेस में बिठा दिया। कहा- जल्दी यहां से निकलो। हम लुधियाना पहुंचे। कोच में टीटीई आ गए। उन्होंने कहा- जिस ट्रेन में टिकट है, उसी में जाकर बैठो। हमारे साथ बच्चे और बजुर्ग भी थे। टीटीई से काफी मिन्नत की लेकिन उसने एक नहीं सुनी। मजबूरी में लुधियाना स्टेशन में पूरे परिवार के साथ उतरना पड़ गया। लुधियाना स्टेशन में रात को उधमपुर- दुर्ग पहुंची। हमारा टिकट एसी कोच के एम-1 में हमारी सीट थी। हम एम-1 में चढ़ गए। लेकिन टीटीई ने 4 हजार लेकर बैठने दिया। ट्रेन में बैठने नहीं दे रहा था। उसने बताया कि तुम लोगों की सीट दूसरे को अलॉट हो गई है। टीटीई से काफी मिन्नतें की और जब मजबूरी बताई तो वह बोला कि चार हजार रुपए अतिरिक्त लगेंगे उसके बाद सीट अलॉट होगी। मजबूरी में टीटीई को चार हजार रुपए देना पड़ा उसके बाद उसने सीट दी। 3 को गए थे परिवार के साथ घनश्याम चंद्राकर परिवार के 7 सदस्यों के साथ 3 मई को गए थे। 4 को सभी लोग दिल्ली में रहे। 5 मई को जम्मू पहुंचे। 6 को आस-पास के मंदिरों में दर्शन किए। 7 मई को जम्मू से 200 किमी दूर भद्रवा गए। अगले दिन 8 को वहां से निकले और शाम को जम्मू आए। उसके बाद फिर जो हुआ वह हमेशा याद रहेगा। (जैसा दुर्ग के घनश्याम चंद्राकर ने भास्कर को बताया) पहलगाम हमले से पहले हर हफ्ते होती थी 6000 बुकिंग राजधानी समेत राज्यभर से इस बार समर सीजन में होने वाला कारोबार पूरी तरह से बैठ गया है। एयरलाइंस के साथ ही ट्रैवल्स एजेंसी वालों को खासा नुकसान उठाना पड़ा है। पहलगाम में हमले के बाद से ही बाहर जाने वालों की संख्या लगातार कम होती गई। भारत-पाक युद्ध शुरू होने के बाद 80 फीसदी लोगों ने बुकिंग कैंसिल करवा दी है। ट्रैवल्स एजेंसियों के अनुसार सालभर में सबसे ज्यादा बुकिंग समर सीजन में ही होती है। लेकिन इस बार यह कारोबार पूरी तरह से बर्बाद हो गया है। पहलगाम में हमले के पहले हर हफ्ते करीब 6000 लोगों की बुकिंग जम्मू-कश्मीर के साथ ही लद्दाख, कुल्लू, मनाली, शिमला, केरल, नैनीताल, दार्जिलिंग, धर्मशाला जैसे शहरों के लिए हो रही थी। हमले के बाद अभी तक एजेंसियों के पास 200 बुकिंग भी नहीं आई। इतना ही नहीं, दो से तीन महीने पहले समर सीजन के लिए कराई गई बुकिंग में 80 प्रतिशत बुकिंग कैंसिल कर दी गई।


