पाकिस्तान के साथ अब राजस्थान के 6 नहीं 5 जिलों की ही सीमा लगेगी। पड़ोसी राज्य गुजरात से अब सांचौर नहीं जालोर जिले की सीमा लगेगी। कांतली नदी के किनारे बसी ताम्रयुगीन गणेश्वर सभ्यता अब नीमकाथाना जिले में नहीं सीकर जिले में होगी। राजस्थान में सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले लाखों कोचिंग छात्रों को अब ये सवाल कुछ इस तरीके से रटने पड़ेंगे। क्योंकि 9 जिले और 3 संभाग को रद्द करने के साथ ही राजस्थान का भूगोल भी बदल गया है। आगामी सालों में राज्य सरकार ने कई विभागों में एक लाख से ज्यादा नौकरियों की घोषणा कर रखी है। इनमें से कुछ भर्तियों के एग्जाम तो 15-30 दिन के अंतराल बाद ही हैं। भूगोल में बदलाव का सबसे बड़ा असर कोचिंग छात्रों पर पड़ रहा है। जनवरी-फरवरी में होने वाली भर्ती परीक्षाओं के सवालों को लेकर कंफ्यूजन है। उनमें राजस्थान में 41 जिलों के हिसाब से प्रश्न पूछे जाएंगे या 50 या फिर पुराने 33 के हिसाब से। इस मुद्दे पर भास्कर टीम ने कोचिंग छात्रों से मिलकर उनकी समस्या और उनके सवाल जाने। फिर राजस्थान में भर्तियां आयोजित करने वाले बोर्ड के अधिकारियों से सवाल-जवाब किए। पढ़िए- पूरी रिपोर्ट…. 21 महीने में दो बार बदला भूगोल, स्टूडेंट बोले- एग्जाम सिर पर, अब बदलाव ने बढ़ाई मुश्किलें अनूपगढ़ जिले को खत्म करने के बाद अब प्रदेश के पांच जिले पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगेंगे। प्रतियोगी पेपर में भी सवाल इसी तरीके के आते हैं कि राजस्थान के कितने जिलों की सीमा अंतर्राष्ट्रीय सीमा से लगी हुई है? या फिर उनकी दूरी कितनी है? फर्स्ट ग्रेड शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे नरेंद्र ने बताया कि जिलों में बदलाव से केवल भूगोल नहीं बदला है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। बिंदू पालावत आरएएस परीक्षा के लिए तैयारी कर रहीं है। उनका कहना है कि अभी कुछ समय पहले ही अपडेटेड बुक्स खरीद के नोट्स तैयार किए थे। लेकिन अब वो बुक्स आउटडेटेड हो गई हैं। बुक्स नई खरीदने के साथ-साथ भूगोल के टॉपिक भी दोबारा तैयार करने होंगे। चूंकि आरएएस-प्री फरवरी में होने की संभावना है। एग्जाम के पीक टाइम पर इस तरह के बदलाव हम स्टूडेंट्स के लिए भी चुनौती बन गए हैं। यतेन्द्री फर्स्ट ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रही हैं। उनका कहना है कि दिखने में यह आसान लग रहा है कि केवल 9 जिले रद्द हुए हैं। लेकिन हकीकत ये है कि सभ्यता, नदियों के उद्गम स्थल, नदियों के बहाव क्षेत्र के नाम और संख्याओं में भी परिवर्तन हुआ है। जैसे- पहले डीग के महल भरतपुर में आते थे। अब वह डीग में आएंगे। वहीं सीकर जिले की सीमा फिर से हरियाणा से लगेगी। ऐसे हजारों सवाल हैं जिनको दोबारा से समझना होगा। उन्हें याद करना होगा। शिक्षक भर्ती के एग्जाम फरवरी में होने की संभावना है। इतने कम समय में ये सब कैसे होगा? भजनलाल सरकार में हुई परीक्षाओं में नए जिलों पर एक भी प्रश्न नहीं कोचिंग छात्रों की समस्याओं से हटकर यह भी सच है कि राजस्थान लोक सेवा आयोग और राजस्थान कर्मचारी बोर्ड ने अगस्त 2023 से लेकर अब तक आयोजित एक भी परीक्षा में पिछली सरकार में नए बने 19 जिलों और तीन नए संभागों को लेकर कोई भी प्रश्न नहीं पूछा था। अब तक 33 जिले मानकर ही प्रश्न पूछे जा रहे थे। कोचिंग से जुड़े एक्सपर्ट की मानें तो दोनों परीक्षा एजेंसियां नई सरकार के जिलों के संबंध में घोषणा का इंतजार कर रही थी। अब घोषणा होने के बाद पूरी संभावना है कि दोनों एजेंसियां 2025 में होने वाली परीक्षाओं में नए जिलों को लेकर सवाल पूछेंगी। साल 2025 में फर्स्ट ग्रेड टीचर परीक्षा, सेकंड ग्रेड टीचर, ग्रेड थर्ड टीचर, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती, जेल प्रहरी भर्ती सहित अन्य परीक्षाएं होंगी। जिसमें नया जीके आने की अब पूरी संभावना है। अधिकृत किताबों को आधार बनाकर ही पढ़ा रहे थे : कोचिंग संचालक जयपुर के महेश नगर में एक कोचिंग संचालक जगदीप ने बताया कि उन्होंने अब तक पुराने पाठ्यक्रम के अनुसार ही पढ़ाई कराई है। उनका कहना था, ‘हमने तब तक पाठ्यक्रम में बदलाव नहीं किया, जब तक सरकार की ओर से अधिकृत किताबों में कोई परिवर्तन नहीं होता। जगदीप के अनुसार अभी भी जब तक अधिकृत किताबों में बदलाव नहीं हो जाता तब तक उसी अनुसार चल नोट्स का उपयोग करने चाहिए। हालांकि हम अब स्टूडेंट्स को नए जिलों के हिसाब से प्रिपेयर करवाना शुरू कर देंगे। अब नया पाठ्यक्रम आएगा तो उसके हिसाब से कई चीजें बदलेंगी। जैसे- अनूपगढ़ जिला हटने के बाद पाकिस्तान के साथ राजस्थान के 5 जिलों श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर और फलोदी जिले की सीमा लगेगी। एक अन्य कोचिंग संचालक कौशल भारद्वाज का कहना है कि हम सरकार के इस फैसले का स्वागत करते है। लेकिन यह बात भी सही है कि कोचिंग छात्रों को परेशानी तो होगी। इन बदलावों के कारण अब हमें भी दोबारा से सभी नोट्स और किताबें छपवानी पड़ेंगी। यह उनकी तैयारी के लिए एक नई चुनौती होगी, लेकिन इसे सकारात्मक दृष्टिकोण से लेना चाहिए। RPSC चेयरमैन बोले- एग्जाम के लिए पहले से तय सिलेबस से ही पूछे जाएंगे प्रश्न आगामी 1-2 महीने में जो सरकारी भर्तियों के एग्जाम होने हैं, जिनके नोटिफिकेशन निकल चुके हैं, उनके पेपर में क्या पुराने वाले जिले मान्य रहेंगे या 41 जिलों के हिसाब से। इस सवाल के जवाब में आरपीएससी के कार्यवाहक चेयरमैन कैलाश चन्द मीणा ने कहा किअपहले सिलेबस में चेंज होता है तब जाकर कोई बदलाव होता है। किसी भी परीक्षा के लिए जब सिलेबस बना था उस समय जो जिले थे वही मान्य होंगे। चन्द मीणा के मुताबिक भविष्य में जो भी भर्तियां होंगी, उनके अगर सिलेबस में किसी तरह का बदलाव होता है, तो जाहिर है एग्जाम में उसी आधार पर प्रश्न पूछे जाएंगे। गहलोत सरकार ने 2023 में की थी घोषणा गहलोत सरकार ने 2023 में राज्य में 17 नए जिले और 3 नए संभाग बनाने की घोषणा की थी। इन बदलावों के बाद राज्य में कुल जिलों की संख्या 50 हो गई थी। गहलोत सरकार ने 17 नए जिले और 3 संभाग बनाए थे, इनमें जयपुर और जोधपुर के 2-2 टुकड़े किए गए थे। नए जिलों में अनूपगढ़, गंगापुर सिटी, कोटपूतली, बालोतरा, जयपुर ग्रामीण, खैरथल, ब्यावर, नीमकाथाना, डीग, जोधपुर ग्रामीण, फलोदी, डीडवाना, सलूंबर, दूदू, केकड़ी, सांचौर और शाहपुरा शामिल थे। वहीं बांसवाड़ा, पाली और सीकर को संभाग बनाया था। पहले जयपुर के टुकड़े कर जयपुर उत्तर, जयपुर दक्षिण और जोधपुर के टुकड़े कर जोधपुर उत्तर और जोधपुर दक्षिण जिलों की घोषणा हुई थी। इस पर पर विवाद हो गया था। ऐसे में बीच का रास्ता निकालते हुए इन जिलों का नाम जयपुर, जयपुर ग्रामीण, जोधपुर और जोधपुर ग्रामीण कर दिया था। भजनलाल सरकार ने किए 9 जिले और 3 संभाग रद्द भजनलाल सरकार ने गहलोत सरकार में नए बने 17 में से 9 जिलों और 3 संभाग को खत्म कर दिया है. इस तरह से देखें तो राज्य में जिलों की संख्या अब 41 हो गई है जबकि अभी तक यह संख्या 50 थी। भजनलाल सरकार ने जिन जिलों को निरस्त किया है उसमें दूदू, केकड़ी, शाहपुरा, नीमकाथाना, गंगापुर सिटी, जयपुर ग्रामीण, जोधपुर ग्रामीण, अनूपगढ़, सांचौर जिले शामिल हैं। वहीं, बालोतरा, ब्यावर, डीग, डीडवाना-कुचामन, कोटपूतली-बहरोड़, खैरथल-तिजारा, फलौदी और सलूंबर जिले यथावत बने रहेंगे। ………… राजस्थान में जिलों के पुनर्गठन से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… गहलोत के बनाए 9 जिले-3 संभाग भजनलाल ने खत्म किए:21 महीने पहले बने थे; सरकार ने कहा- उपयोगिता नहीं थी, कांग्रेस बोली- फिर बनाएंगे राजस्थान में नौ जिले और तीन संभाग कम होने से सिर्फ प्रदेश का भूगोल ही नहीं बदला, बल्कि कई परसेप्शन भी बदल गए। कड़ाके की ठंड में सियासी तूफान का असर राज्य की राजनीति में लंबे समय तक देखने को मिलेगा। पूरी खबर पढ़िए…


