पाकुड़ जिले में माघी पूर्णिमा और संत रविदास जयंती को लेकर श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। रविवार को तड़के से ही बड़ी संख्या में लोग गंगा स्नान और पूजा-अर्चना के लिए घरों से निकल पड़े। माघी पूर्णिमा के अवसर पर जिले के श्रद्धालु पश्चिम बंगाल के धूलियान, फरक्का, जंगीपुर और साहिबगंज जिले के राजमहल स्थित गंगा घाटों पर स्नान के लिए पहुंचे। गंगा स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने विधिवत पूजा-अर्चना की और व्रत-दान कर पुण्य अर्जित किया। कई श्रद्धालु सुबह से ही ट्रेनों और निजी वाहनों से राजमहल पहुंचे, जहां माघी पूर्णिमा को लेकर विशेष धार्मिक माहौल देखने को मिला। बाजारों में रौनक, आदिवासी समुदाय में विशेष उत्साह माघी पूर्णिमा को लेकर जिले के बाजारों में भी खास रौनक रही। फल, फूल और पूजा सामग्री की दुकानों पर सुबह से ही भीड़ जुटी रही। वहीं, राजमहल में लगने वाले माघी पूर्णिमा मेले को देखने के लिए भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। आदिवासी समुदाय के लोगों में इस पर्व को लेकर खास उत्साह देखा गया। आदिवासी समाज के लोग राजमहल के गंगा तट पर लगने वाले मेले को ‘कुंभ मेला’ के रूप में मानते हैं। इस दौरान वे अपने पुरोहितों और गुरुओं के साथ गंगा स्नान कर धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल हुए और इसके बाद मेले का आनंद लिया। धार्मिक उल्लास के बीच मेलों में खरीदारी और सांस्कृतिक गतिविधियां भी देखने को मिलीं। मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पश्चिम बंगाल के गंगा घाटों की ओर जाने से शहर के रेलवे फाटक और मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के पाकुड़-धूलियान मुख्य मार्ग पर लंबा जाम लग गया। इससे लोगों को आवागमन में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं, जिले के महेशपुर, हिरणपुर सहित अन्य प्रखंडों के लोगों ने भी गंगा स्नान कर अपने-अपने इलाकों के मंदिरों में पूजा-अर्चना की। शहर के मनोकामना मंदिर, महाकाल मंदिर, दूधनाथ मंदिर, जटाधारी मंदिर और ठाकुरबाड़ी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कई घरों में भगवान सत्यनारायण की कथा का आयोजन किया गया। इसी दिन संत रविदास जयंती भी श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई।


